हरदोई। हैवानों ने नवजात बच्ची को फेंका और डाक्टरों ने संवेदनहीनता दिखाकर उसे मौत के मुंह में पहुंचा दिया। बच्ची को साढ़े छह घंटे तक इलाज नहीं मिला। इस दौरान डाक्टरों ने बच्ची को लिए लोगों को तीन अस्पतालों के पांच विभागों के चक्कर लगवाए और अपनों की मारी व अव्यवस्थाओं से हारी बच्ची दुनिया से चल बसी।
माधौगंज थाना क्षेत्र के गांव परनखा से करीब 200 मीटर दूर कब्रिस्तान है। गुरुवार सुबह करीब छह बजे खेतों पर गए ग्रामीणों ने कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल के किनारे नया सफेद कपड़ा पड़ा देखा। पास गए तो कपड़े में नवजात बच्ची लिपटी मिली। यह खबर फैलते ही मौके पर लोगों की भीड़ लग गई। ग्रामीणों की सूचना पर आई एंबुलेंस से बच्ची को माधौगंज सीएचसी ले जाया गया। यहां से डॉक्टरों ने उसे जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया।
गांव की आशाबहू और सीएचसी की स्टाफ नर्स सरिता बच्ची को महिला अस्पताल ले गईं। यहां बच्ची लावारिस होने की बात कहकर उसे जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र भेज दिया गया। वहां से बच्ची जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड रेफर कर दी गई। आशाबहू बच्ची को इमरजेंसी वार्ड ले गई। इमरजेंसी के ड्यूटी डा. राधेश्याम स्वामी ने बगैर देखे ही बच्ची की हालत गंभीर बताकर उसे एक नंबर ओपीडी ले जाने को कहा। बच्ची को फिर ओपीडी ले जाया गया। ओपीडी में डॉ. एससी गुप्ता ने बच्ची की हालत गंभीर बताकर बडे़ अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इस आपाधापी में बच्ची ने दोपहर करीब 12:30 बजे दम तोड़ दिया।
जिसे भी इस दर्दनाक घटना का पता चला, उसने डाक्टरों की संवेदनहीनता को धिक्कारा। बच्ची की जान जाने के बाद से हो हल्ला मचा है। अधिकारी जांच कराने का घिसा पिटा बयान दे रहे हैं तो नेता भी अफसोस जताकर दोषियों पर कार्रवाई की बात कह रहे हैं। सदर विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री नितिन अग्रवाल ने कहा कि डीएम से जांच कराएंगे और जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य से दोषी डॉक्टरों पर कार्रवाई कराई जाएगी। शव को पोस्टमार्टम के लिए मार्च्युरी में रखवाया गया है।