राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण योजना के अंतर्गत जिले
के ग्रामीण क्षेत्रों में कंप्यूटर सिस्टम देकर हाईटेक किया जा रहा है।
पांच हजार से अधिक आबादी वाली ग्राम पंचायतों में बने सचिवालयों में
कंप्यूटर लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई और जिले की चयनित 67 ग्राम
पंचायतों में से 35 में कंप्यूटर सिस्टम पहुंच गए, पर यह सिस्टम अभी सिर्फ
शोपीस ही बने हुए हैं।
कंप्यूटरों का उपयोग अभी तक शुरू नहीं हो सका है।
ग्राम पंचायतों की परिसंपत्तियों को अब कंप्यूटर पर दर्ज कर आनलाइन किया
जाना है। परिसंपत्तियों में ग्राम पंचायत की भूमि, भवन और कोई ऐतिहासिक और
धार्मिक स्थल भी दर्ज किए जाएंगे। इसके अलावा परिवार रजिस्टर भी कंप्यूटर
पर बनाए जाएंगे।
ग्राम पंचायतों को हाईटेक बनाने के उद्देश्य से पंचायत राज
विभाग ने राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण योजना से पांच हजार से अधिक आबादी
वाली ग्राम पंचायतों का चयन किया और उनमें कंप्यूटर देने के निर्देश दिए।
जिले में ऐसी 67 ग्राम पंचायतें चयनित की गई है, जिनमें कंप्यूटर सिस्टम
लगेंगे।
इनमें से 35 ग्राम पंचायतों के लिए कंप्यूटर भेज दिए गए। इनमें
सुरसा विकास खंड की हरदोई देहात, भदैचा, खजुरहरा, बावन की बावन, महोलिया
शिवपार, कौढ़ा, बेहटा गोकुल व भिठारी, कछौना की लोन्हारा, गाजू, टिकारी,
महरी, हथौड़ा, जमुरा व गौसगंज, हरियावां की कुरसेली, मझिया, सतौथा,
टोलवाआंट।
कोथावां की कल्यानमल, बेरुआ, शाहाबाद में टुमुर्की, अहिरोरी में
अहिरोरी, करीमनगर सैदापुर, विक्टोरियागंज, नीर व बघौली, हरपालपुर में
समौधा, अरवल व हरपालपुर, टोडरपुर में चठिया धनवार व मझिला, टड़ियावां में
टड़ियावां और पिहानी व बिलग्राम ग्राम पंचायत में कंप्यूटर दिए गए।
ग्राम
पंचायतों में कंप्यूटर भेज तो दिए गए, पर अभी उनका उपयोग नहीं हुआ है।
बताया जा रहा कि कंप्यूटर सिस्टम चलाने में विद्युत आपूर्ति बाधा बनी हुई
है। कई ग्राम पंचायतों में सुचारु विद्युत आपूर्ति नहीं है और कंप्यूटर
सिस्टम को चलाने को जनरेटर व अन्य उपकरण भी नहीं दिए गए।
उधर, सचिवालयों
में कंप्यूटर लगाने के साथ ही पंचायत सहायकों की भर्ती के निर्देश दिए गए
थे। सहायकों की भर्ती का मुख्य उद्देश्य सचिवालयों में नियुक्त कर कंप्यूटर
संचालन करने को ही था, पर अब शासन ने पंचायत सहायकों की भर्ती पर रोक लगा
दी है।
ऐसे में ग्राम पंचायतों में भेजे गए कंप्यूटरों का संचालन करने वाला
भी कोई नहीं है, जिससे भेजे गए कंप्यूटर सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं। उधर,
डीपीआरओ भास्कर दत्त पांडेय ने बताया कि कंप्यूटर सिस्टम को चलाने को अन्य
कमियों को पूरा कराया जाएगा।