कुपोषण को जड़ से समाप्त करने को किए जा रहे प्रयासों
पर जिम्मेदारों की लापरवाही का ग्रहण लगा हुआ है। अतिकुपोषित बच्चों को
स्वस्थ बनाने को उन्हें बेहतर पोषण देने के निर्देश हुए हैं, जिस पर डीएम
ने अनटाइड फंड से प्रधानों को सेरेलैक खरीद कर अतिकुपोषित बच्चों को खाने
में देने के निर्देश दिए।
डीएम ने बाल स्वास्थ्य पोषण दिवस जाकर
प्रधानों को आदेशित भी किया, पर जिम्मेदारों ने अभी बच्चों को सेरेलैक
खिलाना शुरू नहीं किया। ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों में कुपोषण के मामले
सबसे ज्यादा होते हैं। बच्चों को बेहतर पोषण न देने तथा आसपास गंदगी से
नवजात बच्चे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं।
कुपोषण से रोकथाम को प्रदेश में
राज्य पोषण मिशन की शुरुआत की गई है। मिशन के अंतर्गत जिले में दिसंबर में
कराए गए सर्वे में 1,23,634 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं, जबकि 8,750 बच्चों
में अतिकुपोषण मिला। बच्चों में कुपोषण और अतिकुपोषण को दूर करने को अब
शासन ने बेहतर पोषकयुक्त पदार्थ खिलाने को निर्देश दिए, जिस पर डीएम रमेश
मिश्र ने बच्चों के अतिकुपोषण को दूर करने को सेरेलैक खिलाने के निर्देश
दिए।
चूंकि सेरेलैक बेहतर पोषक पदार्थ है, ऐसे में ज्यादा धनराशि होने
की वजह से डीएम ने ग्राम प्रधानों को अनटाइड फंड से सेरेलैक खरीदने के
निर्देश दिए। डीएम ने सेरेलैक खरीदने को ग्राम प्रधानों को दिशा निर्देश तो
दिए ही हैं, वहीं बाल स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस के मौके पर बैठकों में जाकर
प्रधानों को आदेश दिया, पर प्रधानों ने आदेशों को दरकिनार कर दिया।
हालांकि, डीएम और सीडीओ द्वारा गोद लिए चार गांवों को छोड़ दें तो अन्य
किसी भी गांव में ग्राम प्रधानों द्वारा सेरेलैक खरीद कर बच्चों को पोषक
पदार्थ न देने की बात सामने आई है। इस बाबत डीपीओ प्रकाश कुमार ने भी
बच्चों को सेरेलैक देने के संबंध में सीडीपीओ से रिपोर्ट मांगी है, लेकिन
अभी गांवों से रिपोर्ट नहीं आई है।