संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। श्रम और सामग्री अंश का अनुपात बिगड़ने पर भुगतान पर रोक लगते ही कार्यक्रम अधिकारियों ने भुगतान का नायाब तरीका निकाल लिया है। बिलों को डिलीट और दोबारा फीड कराकर भुगतान की लाइन में लगा दिया गया है। विकास खंड हरपालपुर में ही 7.12 करोड़ों के बिलों को वित्तीय वर्ष 2022-23 में डिलीट कराते हुए भुगतान के लिए दोबारा से वित्तीय वर्ष 2023-24 में फीड करा दिया गया है।
मनरेगा में जॉब कार्डधारकों को अधिक से अधिक रोजगार दिए जाने के लिए परियोजना लागत में 60 प्रतिशत राशि श्रमांश और 40 प्रतिशत राशि सामग्री अंश पर खर्च किए जाने का प्रावधान दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2022-23 विकास खंड हरपालपुर में श्रम व सामग्री अनुपात में गड़बड़ी पर भुगतान पर डीएम ने रोक लगा दी थी। इसके बाद कार्यक्रम अधिकारी ने 408 कामों के बिलों को 15 जुलाई को मनरेगा के पोर्टल से डिलीट करा दिया।
इन बिलों के सापेक्ष करीब सात करोड़ पांच लाख 10,641 रुपये का भुगतान होना था। ऐसे ही 23 बिलों के सापेक्ष जॉब कार्डधारकों को श्रमांश भुगतान के लिए करीब 7,77,876 रुपये का भुगतान होना था। इस अवधि में कार्यक्रम अधिकारी रहीं शैलबाला श्रीवास्तव ने इन बिलों को वित्तीय वर्ष 2022-23 से डिलीट कराते हुए चालू वित्तीय वर्ष में भुगतान के लिए दोबारा से फीड करा दिया है।
मनरेगा में बिल डिलीट किए जाने और भुगतान पर रोक के बाद श्रम और सामग्री अंश में गड़बड़ी पर विराम और भुगतान निकालने का कार्यक्रम अधिकारी ने नया तरीका निकाला है।
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ग्राम्य विकास आयुक्त ने मनरेगा में ऐसे बिलों को डिलीट कराए जाने की व्यवस्था दी है, जिनका भुगतान नहीं किया जाना है। विकास खंड हरपालपुर में तत्कालीन कार्यक्रम अधिकारी ने 7.12 करोड़ से अधिक के बिलों को डिलीट कराते हुए चालू वित्तीय वर्ष में भुगतान के लिए फीड करा दिए हैं। बिलों को डिलीट और दोबारा भुगतान के लिए फीड कराए जाने के संबंध में लोकपाल में परिवाद दायर करते हुए तत्कालीन कार्यक्रम अधिकारी शैलबाला श्रीवास्तव साक्ष्य सहित जवाब मांगा गया है।
डॉ. एके सिंह, लोकपाल मनरेगा