अबकी खुला बाजार भी किसानों को दगा देने लगा है और इसके पीछे अहम कारण है गेहूं का गीलापन और कालापन है, जिसने गेहूं के दाम बाजार में समर्थन मूल्य 1450 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल तक कम कर दिए हैं, पर राहत देने वाली बात यह है कि अच्छे गेहूं के दाम मंडी में करीब 14 सौ रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं।
अगर एक दो दिनों भाव बढ़ते हैं, तो यह किसानों के लिए अच्छी बात होगी, पर आवक बढ़ने के साथ ही मंडी में अच्छे गेहूं के भी दाम गिरे तो किसानों पर दोहरी मार पड़ सकती है। मंडी के व्यापारी भी मानते है कि अभी जब मंडी में गेहूं की आवक 2 से 3 हजार प्रति क्विंटल के आसपास है, तब अच्छे गेहूं का भाव 14 सौ रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है और जब आवक 15 से 20 हजार क्विंटल के आसपास पहुंचेगी तो भाव गिर सकते है।
उधर, मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार व्यापारी समर्थन मूल्य योजना के तहत किसानों का गेहूं खरीदना चाहते हैं, ताकि किसानों को पूरी तरह से समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके और इसके लिए उन्होंने आवेदन किए हैं, पर अभी तक अनुमति न मिलने के कारण खरीद नहीं कर पा रहे हैं। उधर, जहां मंडी में लगातार गेहूं की आवक बढ़ रही है, तो मंडी परिसर में ही स्थित क्रय केंद्राें पर सन्नाटा पसरा हुआ है।
क्रय केंद्रों पर अगर किसान नहीं हैं, तो कर्मचारी भी नदारद है। बारदाना रखा हुआ है, पर खरीद नहीं हो रही है। एक
ही परिसर में स्थित आढ़तों में जहां गेहूं की आमद हो रही, वही क्रय केंद्रों पर सन्नाटा व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान लगा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि क्रय केंद्रों पर नमी का मानक बताकर किसानों को या तो टरका दिया जाता है या फिर क्रय केंद्रों से कर्मचारी नदारद रहते हैं, जिससे किसान या तो आढ़तों पर गेहूं बेंचने को मजबूर हो रहे हैं या फिर गांवों में ही औने पौने दामों पर ग्राम व्यापारियों के हाथों गेहूं बेंच रहे हैं।