ग्रामीण पेयजल जागरूकता सप्ताह के आयोजन को लेकर जिले
में फर्जीवाड़ा सामने आया है। वर्ष 14 में 20 से 25 फरवरी तक ग्रामीण
पेयजल सप्ताह के आयोजन को कुछ विभागों को निर्देश दिए गए थे और धनराशि भी
दी गई, पर नियत तिथि पर किसी भी ब्लाक अथवा गांव में सप्ताह का आयोजन तो
हुआ नहीं, वहीं कुछ अफसरों ने धनराशि भी खर्च कर डाली है।
अब डीडीओ ने
आयोजन के बाबत पूर्ण विवरण मांगते हुए अफसरों से आयोजन न कराने पर
स्पष्टीकरण तलब किया है। ग्रामीण क्षेत्र में स्वच्छ जल का प्रयोग करने को
लोगों मेें जागरूकता लाने को वर्ष 14 में 20 से 25 फरवरी तक ग्रामीण पेयजल
जागरूकता सप्ताह का आयोजन करने के निर्देश दिए गए।
गांव में कैंप लगाकर
लोगों को जानकारी देने और गंदे पानी से होने वाली बीमारियों से अवगत कराना
था। सप्ताह के अंतर्गत जल निगम को सार्वजनिक जल स्रोतो का निरीक्षण करने
तथा एफटीके द्वारा जल की गुणवत्ता की जांच करने आदेश दिए गए। जिसके लिए
विभाग को हर 10 हजार रुपये से 1,90,000 रुपये आवंटित हुए।
शिक्षा विभाग में
डीआईओएस को कक्षा छह से 10 तक। बीएसए को कक्षा एक से पांच तक के बच्चों
की जागरूकता के बाबत निबंध व पोस्टर प्रतियोगिता कराने तथा पुरस्कार
बांटने को पांच-पांच हजार रुपये दिए गए। बीडीओ को भी गतिविधियों के संचालन
को 40 हजार रुपये हर विकास खंड को दिए गए।
शासन ने राशि का आवंटन कर अफसरों
को वित्तीय नियमों का पालन कर व्यय करने तथा व्यय का विवरण, गतिविधियों की
फोटोग्राफी, सीडी व कार्यक्रम से संबंधित बिंदुवार आख्या मार्च माह में
देने के निर्देश दिए गए, पर एक वर्ष बीतने के बावजूद अभी तक कोई व्यय विवरण
और गतिविधियों की रिपोर्ट नहीं आई।
ऐसे में डीडीओ ने जागरूकता सप्ताह के
आयोजन पर संदेह जताया है। बीडीओ भरावन ने तो 40 हजार रुपये में से
29,965 रुपये की चेक एक वर्ष बाद 23 फरवरी 15 को वापस कर दी, पर विवरण नहीं
दिया। ऐसे में डीडीओ ने फर्जीवाड़ा की आशंका जताते हुए जल निगम के अधिशासी
अभियंता, डीआईओएस, बीएसए और सभी बीडीओ से विवरण तलब करते हुए तीन दिन में
स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं।