सवायजपुर क्षेत्र के लिए किसानों को सिंचाई की
सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। 38 वर्षों से क्षेत्र में सूखे पड़े
रजबहों में पानी लाने को अभी तक क्षेत्र को कोई भागीरथ नहीं मिल सका और
किसान अब निराश हो चुके हैं, तो तमाम बुजुर्ग किसान सिंचाई के लिए नहरों
में पानी आने की हसरत लिए दुनिया से विदा हो गए।
आज भी क्षेत्र के किसानों
को रजबहों नहरों में पानी आने का इंतजार है। करीब 35 वर्षों पूर्व
करोड़ों खर्च कर बनाए गए सवायजपुर बरबन रजबहों में पानी नहीं आया है। हर
बार चुनावों में इन रजबहों में पानी लाने के वादे होते हैं, पर चुनाव के
बाद वादे करने वालों के इरादे कमजोर हो जाते हैं, जिससे 38 सालों सूखे
पडेे़ इन रजबहों में पानी नहीं आ सका।
ज्ञात हो कि वर्ष 76 में जिले में
सवायजपुर और बरवन रजबहा का निर्माण कई करोड़ रुपये खर्च कर बनाए गए थे, पर
रजबहों के निर्माण होने के बाद इतने सालों बाद भी किसानों को अभी तक सिंचाई
के लिए पानी नहीं मिल सका है।
नहर विभाग के हरदोई स्थित नोडल कार्यालय के
अनुसार सवायजपुर बरबन रजबहों में पानी न आने को लेकर जब सर्वे हुआ तो पता
चला कि पानी का बहाव कम होने एवं रजबहों की डिजाइन की तकनीकी खामियों से
पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
इस पर करीब दस वर्ष पूर्व इन रजबहों में
पानी पहुंचाने को गर्रा नदी पर 50 करोड़ से अधिक के स्टीमेट से लिफ्ट
सिस्टम बनाकर पानी पहुंचाने का प्रस्ताव हुआ। पिछले दस वर्षों से यह
प्रस्ताव सिर्फ प्रस्ताव बनकर रह गया है।
उधर, लोस, विस चुनाव के दौरान इन
रजबहों में पानी लाने के मामले उठते हैं, पर चुनाव बाद वादे फिर ठंडे बस्ते
में चले जाते हैं। इसके अलावा शाहजहांपुर के नहर विभाग के अंतर्गत आने
वाले सवायजपुर बरबन रजबहों में पानी न आने को लेेकर वहां के अभियंताओं को
फ्रिक नहीं है।
न तो उनके पास जिले में होने वाली सिंचाई बंधु की बैठकों
में आने की फुर्सत है और न ही जिला प्रशासन के संपर्क में रहने की जरूरत। उधर,
नहर विभाग के सिंचाई प्रखंडों के नोडल अधिकारी एसके झा ने कहा कि रजबहों
में पिछले 38 वर्षों से पानी न आने की जानकारी किसानाें से मिलती है।
शाहजहांपुर से कोई सूचना नहीं दी जा रही है। वो इस ओर प्रखंड को पत्र भेजकर
सूचनाएं मुहैया कराने का आग्रह करेंगे।