फोटो 26: यह मुक्ति वन क्षेत्र है : कहने को तो ओदरा नेवलिया में फोटो में दिख रहा स्थल मुक्ति वन
हरदोई। हर साल पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य और संदेश के साथ पौधे रोपित किए जाते हैं। देखभाल न होने से पौधे खुद के जीवन को बचाने के लिए संघर्ष करते-करते दम तोड़ देते हैं। ऐसे में इस प्रकार के पौधरोपण से हरियाली और ऑक्सीजन कहां से लाई जा सकती है। विश्व पर्यावरण दिवस पर सभी ने पौधे रोपित किए और हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया। पिछले साल रोपित किए गए पौधों का हाल यह है कि कई स्थानों पर पौधे बचे ही नहीं हैं। पौधरोपण के नाम पर सिर्फ बोर्ड ही बचे हैं।
पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण अभियान में पिछले साल रोपित कराए गए पौधों में से लखनऊ मंडल की मंडलायुक्त की तरफ से सुरसा के ओदरा पचलाई में मुक्तिवन और कछौना के कामीपुर में बाल वाटिका में पौधरोपण किया था। पौधरोपण में एक पेड़ मां के नाम के साथ ही विभिन्न वाटिका की स्थापना भी कराई गई थी। पिछले साल पौधरोपण अभियान का औपचारिक तौर पर शुभारंभ जिले की नोडल और लखनऊ मंडल की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने किया था। पौधरोपण के शुभारंभ के मौके पर उत्सव मनाया गया था और वृहद भू-भाग में पौधरोपण किया गया था।
नोडल अधिकारी ने वन रेंज कछौना के कामीपुर में बाल वाटिका में पौधरोपण किया था। कामीपुर में उन्होंने हरिशंकरी रोपित की थी। वहीं विकास खंड सुरसा के ओदरा पचलाई में मुक्ति वन में पौधरोपण किया गया था। वन विभाग के माध्यम से कराए गए पौधरोपण में पीपल, बरगद, नीम के साथ ही मौलश्री आदि के पौधों को भी रोपित किया गया था। इनकी देखभाल न होने से यह पौधे कुछ दिन के ही मेहमान साबित हुए। देखरेख न होने से समय के साथ पौधों का अस्तित्व समाप्त होता चला गया। करीब एक साल बाद सुरसा के ओदरा पचलाई में रोपित किए गए मुक्ति वन में पौधे ही नहीं बचे। वहां पर सिर्फ पहचान के लिए मुक्ति वन का बोर्ड लगा है।