हरदोई। आम दिनों में जहां एक तरफ मेडिकल कॉलेज के वार्ड मरीजों से भरे रहते थे। वहीं, परिवार संग होली मनाने की चाहत में वार्ड आधे से अधिक खाली हो गए हैं। बीते 48 घंटों में हर वार्ड से काफी संख्या में मरीजों ने छुट्टी करवा ली हैं। हालांकि चिकित्सीय स्टाफ ने मरीजों की रिकवरी होने के बाद ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी दिए जाने की बात कही है। वहीं, जो मरीज गंभीर थे फिलहाल उन्हें छुट्टी नहीं दी गई।
साल भर का त्योहार परिवार के साथ मनाने की बेताबी में पिछले दो दिनों के भीतर आधे से अधिक मरीजों ने अस्पताल से छुट्टी करा ली है। मेडिकल कॉलेज के विभिन्न वार्डों से काफी अधिक संख्या में मरीजों ने डिस्चार्ज ले लिया है। जो वार्ड मरीजों और उनके तीमारदारों से खचाखच भरे रहते थे वहां अब सन्नाटा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि होली पर भर्ती मरीजों ने घर जाने की इच्छा जताई और स्वस्थ महसूस करने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई है।
मेडिकल कॉलेज के सर्जिकल वार्ड में कुल 33 बेड हैं और इन पर रविवार तक करीब 23 मरीज भर्ती थे। वहीं, अब 14 मरीज छुट्टी करवाकर घर जा चुके हैं। इसी प्रकार मेडिसिन वार्ड के 23 बेड पर 20 मरीज भर्ती थे। इनमें से 11 मरीज जा चुके हैं। उधर, हड्डी वार्ड के 36 बेडों पर 27 मरीजों में से 12 ने छुट्टी करवा ली है और दोपहर बाद कुछ और की छुट्टी की जानी थी। पीकू वार्ड के 42 बेडों पर 25 मरीज थे, इनमें से 17 छुट्टी करवाकर अपने घर चले गए हैं।
जरौली नेवादा की रहने वाली गंगावती का बच्चेदानी का ऑपरेशन हुआ था। पांच दिनों से मेडिकल कॉलेज में भर्ती थीं। रिकवरी होने पर बुधवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। उन्होंने बताया कि थोड़ा दर्द भले ही है लेकिन अब ठीक हैं। वैसे भी त्योहार पर घर में होना जरूरी है।
हरियावां निवासी डेढ़ वर्षीय प्रीतम मिश्रा भी बीते छह दिनों से पीकू वार्ड में भर्ती था। हालत ठीक होने पर उन्हें भी मंगलवार की शाम को छुट्टी दे दी गई। परिजनों ने बताया कि पहले से अब स्वास्थ्य ठीक है तो छुट्टी करवा ली है।
रिकवरी होने पर ही दी गई छुट्टी
प्राचार्य डॉ. जेबी गोगोई ने बताया कि स्टाफ ने छुट्टी देने में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती है। मरीजों का स्वास्थ्य प्राथमिकता पर है। केवल उन्हीं मरीजों को घर जाने की अनुमति दी गई है जिनकी स्थिति स्थिर थी और रिकवरी संतोषजनक थी। जो मरीज गंभीर हैं या जिन्हें निरंतर निगरानी की जरूरत है उन्हें फिलहाल डिस्चार्ज नहीं किया गया है।
फोटो-06- मेडिकल कॉलेज के सर्जिकल वार्ड में खाली पड़े बेड। संवाद