फोटो-20- संडीला औद्योगिक क्षेत्र में स्थित इंदु वैष्णों इंडस्ट्रीज। संवाद
संडीला। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर संडीला के औद्योगिक क्षेत्र पर पड़ रहा है। यहां प्लास्टिक उत्पादों से जुड़ी तकरीबन 20 फैक्टरियां हैं। कच्चे माल की बढ़ी हुई कीमतों से प्लास्टिक आधारित उद्योगों में उत्पादन 50 फीसदी कम हो गया है। दरअसल जो प्लास्टिक दाना युद्ध से पहले 98 रुपये प्रति किलो मिलता था वह अब 152 रुपये प्रति किलो हो गया है।
संडीला औद्योगिक क्षेत्र में बड़ी संख्या में उद्योग लगे हैं। आइसक्रीम कोन समेत कई उत्पाद बनाने वाली कंपनियां युद्ध के साइड इफेक्ट के कारण बंद हैं। बेकरी और रेस्टोरेंट में वाणिज्यिक गैस सिलिंडर न मिलने के कारण मैदा और आटे की खपत कम हो गई है। इसका असर भी संडीला स्थित फ्लोर मिलों में पड़ा है। इसके साथ ही प्लास्टिक उद्योग भी संकट में आ गए हैं।
राजकीय पाइप फैक्टरी के संचालक मनोज कुमार ने बताया कि होली से पहले प्लास्टिक दाना 98 रुपये में था। अब इसकी कीमत 152 रुपये हो गई है। पहले हर रोज 10 टन पाइप का उत्पादन फैक्टरी में होता था लेकिन अब यह घटकर दो से तीन टन रह गया है। इसकी वजह बताते हुए कहते हैं कि प्लास्टिक पाइप की कीमत बाजार में भी 100 रुपये से बढ़कर 160 रुपये हो गई है। इस कारण बाजार में भी खपत कम है। प्लास्टिक दाना आम तौर पर उन्हीं देशों से आता था जहां युद्ध चल रहा है।
इंदु वैष्णो इंडस्ट्रीज के संचालक गणेश शुक्ला का कहना है कि ईरान से आने वाले कच्चे माल में 70 से 80 फीसदी तक की महंगाई बढ़ी है। महंगे दामों पर कच्चा माल लेने के बाद अगर बाजार में उत्पादों की कीमतें घटती हैं तो इसका नुकसान उद्योगपति को होता है। इस उतार-चढ़ाव के बीच फिलहाल कई इकाइयों ने उत्पादन रोक दिया है।
श्यामल इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के मालिक सुनील मिश्रा कहते हैं कि कच्चे माल की कीमत चढ़ने से उद्योग चलाना मुश्किल हो गया है। कहा कि कई करोड़ का निवेश कर फैक्टरी स्थापित की लेकिन उत्पादन ठप करना पड़ रहा है। इस बीच कर्मचारियों की तनख्वाह समेत अन्य खर्चे लगातार हो रहे हैं।
फोटो-20- संडीला औद्योगिक क्षेत्र में स्थित इंदु वैष्णों इंडस्ट्रीज। संवाद
फोटो-20- संडीला औद्योगिक क्षेत्र में स्थित इंदु वैष्णों इंडस्ट्रीज। संवाद
फोटो-20- संडीला औद्योगिक क्षेत्र में स्थित इंदु वैष्णों इंडस्ट्रीज। संवाद