बाजार में बिक्री के लिए लगा गन्ना।
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हरदोई। आषाढ़ शुक्लपक्ष की एकादशी को सोये देवता चार महीने बाद देवोत्थानी एकादशी पर गुरुवार को जाग गए। घरों में परंपरागत तरीके से गन्ना, सिंघाड़ा, मूंगफली और गुड़ भगवान को भोग लगाया गया। इसी के साथ मांगलिक कार्यों की भी शुरुआत हो गई। गुरुवार से विवाह सहित सभी मांगलिक कार्य शुरू हो गए।
शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि पुराणों के अनुसार देवोत्थानी एकादशी को पर्व के रूप में मनाये जाने का खासा महत्व है। मान्यता है कि अषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली हरिशयनी एकादशी वाले दिन से भगवान विष्णु विश्राम के लिए चले जाते है एवं चर्तुमास तक विश्राम करते हैं। दिवाली के बाद पड़ने वाली देवोत्थान एकादशी के दिन विश्राम से बाहर आते हैं। इस कारण देवोत्थानी एकादशी का दिन काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन लोगों द्वारा आस्था तथा विश्वास के साथ उनकी पूजा अर्चना करने के साथ तैयार हुई नई फसलों का भोग लगाया जाता है।