नोट : पड़ताल को लोगो लगाएं
फोटो-19-धामापुर में ग्राम चौपाल में मौजूद ग्रामीण व अन्य। स्रोत ग्रामीण
- हर शुक्रवार को ग्राम चौपालों का होता है आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। ग्रामीणों की समस्याओं को गांव में ही सुनकर निस्तारित कराने के क्रम में शासन ने ग्राम चौपालों का आयोजन करने के निर्देश दिए थे। शुरुआती दौर में ग्राम चौपालों का आयोजन भव्यता से हुआ, लेकिन धीरे धीरे सब कुछ थम सा गया।
डीएम और सीडीओ जैसे अफसर ग्राम्य विकास विभाग की इन चौपालों को लेकर भले ही गंभीर हाें, लेकिन मातहत जमकर लापरवाही कर रहे हैं। ग्राम चौपालों को लेकर जारी शासनादेश में स्पष्ट उल्लेख है कि कम से कम खंड विकास अधिकारी ग्राम चौपालों में जरूर प्रतिभाग करें।
प्रत्येक विकास खंड की दो दो ग्राम पंचायतों में हर शुक्रवार को ग्राम चौपाल आयोजित किए जाने का निर्देश है। खंड विकास अधिकारी दोनों ही चौपालों में शामिल हो सकें, इसलिए सीडीओ कार्यालय से ऐसा रोस्टर बनता है कि दो चौपालों के समय में अंतर रहे।
खास बात यह है कि रोस्टर भी दो माह का एक साथ जारी किया जाता है। बावजूद इसके खंड विकास अधिकारी पूर्व निर्धारित चौपालों में पहुंचते ही नहीं। एडीओ पंचायत, ग्राम सचिव और ग्राम प्रधान की मौजूदगी में महज औपचारिकता ही पूरी की जा रही है।
केस-1
पिहानी विकास खंड की दो ग्राम पंचायतों धामापुर और देवमलपुर में शुक्रवार को ग्राम चौपाल का आयोजन हुआ। ग्राम प्रधानों ने चौपाल को लेकर तैयारियां भी कराईं। दोनों ही जगह बड़ी संख्या में ग्रामीण चौपाल में शामिल होने भी पहुंचे, लेकिन कई घंटों के इंतजार के बाद भी दोनों ही जगह खंड विकास अधिकारी पहुंचे ही नहीं। ऐसे में चौपाल तो आयोजित हुई, लेकिन महज कागजी ही साबित हुई।
केस-2
हरियावां विकास खंड के अहमदी और अगौलापुर ग्राम पंचायतों में शुक्रवार को ग्राम चौपालों का आयोजन किया गया। दोनों ही स्थानों पर ग्रामीण तो पहुंचे, लेकिन हरियावां की भी खंड विकास अधिकारी दोनों में से एक भी चौपाल में नहीं गईं। यहां भी फाइलों में चौपाल का आयोजन दर्ज हो गया, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा।
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...और गंभीरता का अंदाजा इन जवाबों से लगाइए
. खंड विकास अधिकारी पिहानी अरुण कुमार से ग्राम चौपालों में न पहुंचने पर सवाल हुआ। जवाब मिला कि एडीओ पंचायत को भेजा था। खुद क्यों नहीं गए तो बता दिया कि कार्यालय में बैठक थी।
. हरियावां की बीडीओ निधी राठौर से भी ग्राम चौपालों में न पहुंचने पर सवाल किया गया। जवाब मिला कि एडीओ को भेजा था, खुद कार्यालय में थे। कोई इश्यू हो तो बताइए।
वर्जन
ग्राम चौपालों में हर खंड विकास अधिकारी का जाना अनिवार्य है। जो खंड विकास अधिकारी शुक्रवार की जन चौपालों में नहीं गए हैं, उन सबसे स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा। चौपालों में न जाना शासन के निर्देशों की अनदेखी के साथ ही खंड विकास अधिकारियों की लापरवाही भी है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।-मंगला प्रसाद सिंह, डीएम, हरदोई
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ग्राम चौपाल के उद्देश्य :
ग्राम्य विकास विभाग की ओर से ग्राम चौपाल का आयोजन किया जा रहा है। चौपाल का उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं को गांव में ही सुनकर उनका निराकरण कराया जाना है। चौपाल में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बुलाए जाने की व्यवस्था दी गई है। खंड विकास अधिकारी को भी मौजूद रहने के निर्देश हैं। गांव की साफ-सफाई, जलनिकासी, बिजली आपूर्ति और बिल, विभिन्न पेंशन योजना, आवास सर्वे, मनरेगा मजदूरी भुगतान, समूह सखी के कार्य आदि पर चर्चा किया जाना। सामुदायिक शौचालय, पंचायत भवन, सड़क, विद्यालय भवन व संचालन, मध्याह्न भोजन योजना, सिंचाई व्यवस्था, संचारी रोग नियंत्रण अभियान, टीकाकरण, अनाज वितरण आदि का सत्यापन भी शामिल है।