वट सावित्री व्रत महज एक व्रत नहीं है, बल्कि सूत्र
है विश्वास का कि हम साथ-साथ रहेंगे। आधार है जीने का कि हमारा साथ न छूटे
और भगवान पर आस्था कि पति दीर्घायु हो। आज हम कितना आधुुनिक क्यों न हो
जाएं, कहना गलत न होगा कि भारतीय पत्नी की सारी दुनिया उसके पति से शुरू
होकर उसी पर खत्म होती है।
कुछ ऐसे ही संस्कार व संस्कृति को लेकर रविवार
को एक बार फिर सुहागिनें पति की दीर्घायु होने की कामना को लेकर वट वृक्ष
की पूजा करेंगी। शास्त्री उमाकांत अवस्थी बताते हैं कि वट यानी बरगद की
आयु तथा स्थिरता सबसे अधिक होती है।
इसके नीचे बैठकर पूजा, कथा, दान, धर्म
आदि किए गए कर्मों का फल कभी नष्ट नहीं होता है, इसलिए वट वृक्ष के नीचे
भगवान शंकर ने माता पार्वती को अमर कथा सुनाई। काक भुसुंड ने गरुण जी को
कथा सुनाई और सावित्री ने सत्यवान के प्राण यमराज से वापस ले लिए। यह व्रत
पति की दीर्घायु के लिए किया जाता है।
उधर, पति की लंबी आयुु और मंगल के
लिए रखे जाने वाले व्रत को लेकर पिछले काफी समय से बाजार गुलजार हैं। ऐसे
में सुहाग के पर्व को मनाए जाने के लिए सजे बाजार में रौनक बढ़ गई है। साड़ियों
की दुकानों में सुहागिनों की भीड़ दिखाई दी। बहरहाल सजना के लिए सजनी को
सजाने के लिए बाजार का रंग बदला बदला नजर आ रहा है।
उधर, पर्व को लेकर जहां
साड़ियों से लेकर सर्राफा की दुकानों में सुहागिनों की भीड़ जमा होने लगी
है, वहीं शहर के ब्यूटी पार्लर भी इनसे अछूते नहीं है। यहां पर भी सजने
संवरने के लिए सुहागिनों को ब्यूटी पार्लर संचालकों से समय लेना पड़ रहा
है।
इसके अलावा सुहाग से संबंधित हर दुकानदार को जहां अपने दुकानों के
उत्पादों की अच्छी बिक्री को लेकर आशाएं बंधी है, वहीं इसी क्रम में चूड़ी
की दुकानों पर भी सुहागिनों के द्वारा बिक्री जोरों पर है। यहां पर सिंपल
से लेकर कामदार चूड़ियों की बिक्री जोरों पर की जा रही है।