कु दरत की मार ने किसान के साथ बागवान को बर्बाद कर
डाला। फल पट्टी क्षेत्र में इस बार फलों के राजा आम पर मौसम का ग्रहण लग
गया, जिसके चलते करीब 60 फीसदी फसल प्रभावित होने के आसार प्रबल हो गए हैं।
बागवानों की माने तो पहले बारिश फिर ओलावृष्टि से बौर गिर गया, इसके बाद
बचे बौर को भुनका रोग ने प्रभावित कर दिया।
अब पेड़ों पर बचे आम पर भी
काले धब्बे पड़ रहे हैं। इसको लेकर बागवान खासे चिंतित नजर आ रहे।
क्षेत्रीय बागों में अलग-अलग प्रजाति के आम के पेड़ लगे हैं, जिन पर
प्रतिवर्ष आम की भारी पैदावार होती है। यहां के आम देश की अलग अलग मंडी
दिल्ली, बिहार, कलकत्ता आदि में भी भेजे जाते हैं।
आम की पैदावार को देखते
हुए सूबे की सरकार ने बीते वर्षों में इस क्षेत्र को फ लपट्टी घोषित किया
था, पर यहां पर सुविधाओं का टोटा रहा। जिसका असर आम की पैदावार पर अब दिख
रहा है। इस वर्ष पेड़ाें पर अच्छा बौर आया था, जिससे अनुमान था कि इस वर्ष
आम की अच्छी पैदावार होगी।
पर बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने बागवानों के
सपनोें को चकनाचूर कर दिए। उधर, क्षेत्र के बड़े आम व्यापारी व बागवान
मोहसिन खां ने बताया कि बेमौसम बारिश व भुनका लगने से बौर पहले ही झड़ गया
था, इसके बाद खर्रा बीमारी से भी आम की फसल अब प्रभावित हो रही।
उन्होंने
कहा कि इस बार करीब 60 फीसदी पैदावार मेें गिरावट के आसार है। बताया कि एक
बाग 9 लाख रुपये मेें ठेके पर लिया था, पर पैदावार में गिरावट से एक लाख
रुपये का आम भी निकलना मुश्किल लग रहा है। इसी तरह दिलावरपुर निवासी राशिद
खां का बाग 34 लाख में दो साल के लिए व्यापारियों ने ठेके पर लिया था, पर
पांच लाख का आम भी इस बार निकलता नजर नहीं आ रहा है।
फिरोज खां का बाग
भी 12 लाख में ठेके पर आम व्यापारियों ने लिया था, पर यहां भी उन्हें घाटा
होता नजर आ रहा है। गांव नरसियामऊ निवासी रामवीर के पास 18 बीघा आम का बाग
है। इस बार उन्होंने 55 हजार रुपये में आम की फसल एक बाहरी व्यापारी को
ठेके पर दी थी, पर आम में बौर झड़ जाने से कारण व्यापारी बगैर बताए गायब हो
गया।