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Hardoi News: रेडियोलॉजिस्ट न होने से अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला, कोई नहीं मरीजों को देखने वाला

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मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड कक्ष में लगा ताला। - फोटो : मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड कक्ष में लगा ताला।
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध महिला चिकित्सालय में आने वाली मरीजों की समस्या कम नहीं हाे रही है। रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने के कारण यहां अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लगा नजर आता है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में चिकित्सक अल्ट्रासाउंड की सलाह मरीजों को दे रहे हैं, लेकिन मरीजों काे अल्ट्रासाउंड कराने के लिए प्राइवेट केंद्रों पर जाना पड़ रहा है। दरअसल, रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती ताे यहां हुई है, लेकिन उन्होंने कार्यभार ही नहीं संभाला है।
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न सिर्फ हरदोई जनपद में बल्कि पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की सुविधाएं बढ़ाने का दावा आए दिन किया जाता है। इन दावों में काफी हकीकत भी है। अस्पतालों की नई-नई इमारतें बन रही हैं, लेकिन मानव संसाधन की स्थिति जस की तस है। जनपद में भी कुछ ऐसा ही हाल है। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध महिला चिकित्सालय में रेडियोलॉजिस्ट के पद पर तैनात रहे डॉ. अरुण कुमार का तबादला इसी पद पर 17 जनवरी को हमीरपुर हो गया था। उन्होंने कार्यभार भी छोड़ दिया। उनकी जगह यहां शासन स्तर से गौतमबुद्धनगर में तैनात एक रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति हरदोई में की गई थी। नियुक्ति आदेश जारी होने के लगभग 20 दिन बाद भी उन्होंने यहां कार्यभार नहीं संभाला है।
नतीजा यह कि अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लटकता रहता है। मरीजों को भटकना पड़ता है और जेब भी ढीली करनी पड़ती है। अल्ट्रासाउंड बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं काे हो रही है। इससे इतर मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में चिकित्सक मरीजों को अल्ट्रासाउंड की सलाह तो दे रहे हैं, लेकिन परिसर में अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। इस कारण मरीजों को प्राइवेट लैब में ही जाना पड़ रहा है।
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केस-1

शहर के सिविल लाइन में रहने वालीं पूनम सोनी को ओपीडी में चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। वह मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए गईं, लेकिन उन्हें वहां ताला लटकता मिला। इसके बाद वह प्राइवेट लैब चली गईं।



केस-2

शहर के मोमिनाबाद निवासी आसना भी महिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर पड़े ताले को देखती मिलीं। पूछने पर पता चला कि डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड लिखा था। सोमवार को भी आई थीं और तब भी ताला ही पड़ा था। फिर खुद ही बोलीं कि अब किसी प्राइवेट लैब में जाना पड़ेगा।





रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती हुई थी, लेकिन अभी तक उन्होंने ज्वाइन नहीं किया है। शासन को इसकी जानकारी भेज दी है। वैकल्पिक व्यवस्था की कोशिश की जा रही है। अधिकृत तौर पर यह व्यवस्था होने में लगभग 20 दिन लग जाएंगे। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत भी अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था कराने की कोशिश कर रहे हैं। -डाॅ. जेविन विष्णु गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज, हरदोई
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