हरदोई। करीब 14 साल पुराने हत्या के एक मामले में अपर जिला जज कोर्ट संख्या चार अच्छे लाल सरोज ने दो सगे भाइयों को कोर्ट में तलब किया है। इसी मामले में 12 साल पहले अन्य दो सगे भाइयों को उम्रकैद की सजा हो चुकी है।
कोर्ट में तलब किए गए दोनों भाइयों के नाम पुलिस ने विवेचना के दौरान आरोप पत्र में शामिल नहीं किए हैं। बिलग्राम थाना क्षेत्र के लालपुर कंहारी गांव निवासी तारिक उर्फ चांद मियां ने 14 अप्रैल 2009 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि इसी दिन अपने भाई आरिफ के साथ खेत की तरफ जा रहा था। गांव के किनारे शेरपुर गांव निवासी इरशाद व इरफान उर्फ मुन्ना व जरौली निवासी अब्दुल अजीज, जामिन व अकील आ गए।
इन लोगों ने कहा कि दुश्मन मिल गया है गोली मार दो। इरशाद व अब्दुल अज़ीज़ ने तमंचे से फायर कर दिया। गोली आरिफ को लगी और उसकी मौके पर मौत हो गई। लोगों के आने पर आरोपी मौके से भाग गए थे। पुलिस ने पांचों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी।
पुलिस ने 14 जुलाई 2009 को इरशाद व इरफान के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। पुलिस ने विवेचना के दौरान अकील, जामिन व अब्दुल अजीज का नाम आरोप पत्र से निकाल दिया। तारिक ने 11 दिसंबर 2009 को न्यायालय में इन तीनों आरोपियों को तलब करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 19 अक्टूबर 2011 को इरशाद व इरफान उर्फ मुन्ना को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तारिक उर्फ चांद मियां ने उच्च न्यायालय लखनऊ में आरोपियों को तलब करने के लिए अपील की। उच्च न्यायालय के आदेश पर अपर सत्र न्यायालय में मामले की दोबारा सुनवाई की गई। आरोपी अकील व जामिन को तलब किया है। अब्दुल अजीज की मौत चुकी है।