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Hardoi News: दस मिनट में देखे जा रहे बीस मरीज, दर्द बताने से पहले पर्चे पर लिख जाती दवा

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फोटो-10- मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में चिकित्सक कक्ष के बाहर लगी मरीजों की लाइन। संवाद
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज में बेहतर इलाज की उम्मीद में आने वाले मरीजों को बहुत राहत मिलती नजर नहीं आ रही। दरअसल मरीजों के बोझ तले दबे चिकित्सक परामर्श देने में जल्दबाजी करने को मजबूर हैं। पर्चा बनवाने से लेकर ओपीडी में डॉक्टर मिलने तक मरीज और तीमारदार को डेढ़ से दो घंटे लगते हैं, लेकिन चिकित्सक को पूरा दर्द बताने से पहले ही दवा का पर्चा बन जाता है। मरीजों की भीड़ का आलम यह है कि चिकित्सक दस मिनट में 20 मरीज देखते हैं।
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मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हर रोज औसतन ढाई हजार मरीज पहुंचते हैं। अन्य दिनों की अपेक्षा बृहस्पतिवार को भीड़ कम थी लेकिन फिर भी 1765 मरीजों के पर्चे बनाए गए। किसी तरह चिकित्सक के पास पहुंचने वाले मरीज को महज आधा मिनट ही मिल पाता है। ओपीडी का समय वैसे तो आठ से दो बजे का है लेकिन वार्डों का राउंड लेने के बाद डॉक्टर नौ बजे तक ओपीडी शुरू कर पाते हैं। हर विभाग में परामर्श लेने के लिए 250 से 350 तक मरीज पहुंचते हैं। पांच घंटे में प्रत्येक मरीज को भी परामर्श देने में सिर्फ खानापूर्ति ही हो रही है। ऐसे में अगर किसी मरीज को जांच लिखी जाती है तो फिर उसे दूसरे दिन ही उचित उपचार मिल पाता है।



हड्डी रोग से पीड़ितों को दूसरे दिन मिल पाता उपचार



हड्डी रोग विभाग में भी रोजाना 300 से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें फ्रैक्चर के मरीज अधिक होते हैं। ऐसे मरीजों का समुचित उपचार दूसरे ही दिन मिल पाता है। इसकी वजह यह है कि एक तो भीड़ अधिक होती है, जैसे तैसे मरीज डॉक्टर के पास पहुंचते हैं तो उन्हें एक्सरे कराने की सलाह दी जाती है। एक्सरे कक्ष के बाहर भी लंबी लाइन लगी होती है। तमाम मरीज ऐसे होते हैं कि तब तक एक्सरे रिपोर्ट लेकर आते हैं तब तक ओपीडी का समय पूरा हो जाता है और डॉक्टर चले जाते हैं। मरीजों को समुचित उपचार के लिए दूसरे दिन आना पड़ता है।
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केस-1- महमदपुर गांव निवासी लल्लू पाल ने बताया कि वह पैर में दर्द होने पर दिखाने आया था। सुबह 10 बजे के करीब वह अस्पताल आ गए थे। डॉक्टर तक पहुंचने में ढाई घंटे लग गए। डॉक्टर को पूरी बात भी नहीं बता पाए तब तक उन्होंने पर्चा लिख दिया।



केस-2- बहरा सौदागर पूर्वी निवासी अनुराग पांडेय ने बताया कि पेट में दिक्कत के बाद सर्जरी विभाग में दिखाने आए थे। दो घंटे से लाइन में लगने के बाद डॉक्टर के पास पहुंचे तो उन्होंने सिर्फ आधे मिनट में ही हॉल पूछकर दवा लिख दी,अब दवा लेने जा रहे हैं।







ओपीडी में मरीजों को पूरा समय देना डॉक्टरों की जिम्मेदारी है। अगर कोई डॉक्टर देरी से आता है और सभी मरीजों को समुचित परामर्श नहीं देता है तो जानकारी की जाएगी और संबंधित से जवाब तलब किया जाएगा।



डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज

फोटो-10- मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में चिकित्सक कक्ष के बाहर लगी मरीजों की लाइन। संवाद

फोटो-10- मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में चिकित्सक कक्ष के बाहर लगी मरीजों की लाइन। संवाद

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