हरदोई। हरपालपुर विकास खंड में तैनात रहे ग्राम विकास अधिकारी कौशलेंद्र सिंह ने सिर्फ गौरिया ही नहीं बल्कि आवंटित अन्य ग्राम पंचायतों मेें भी खेल करने में कसर नहीं छोड़ी। ट्री गार्ड और सीमेंट के नाम पर भी सचिव ने घोटाला किया है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक जिस एजेंसी के नाम भुगतान किया जाता रहा वह कौशलेंद्र सिंह से ही जुड़ी हुई है।
हरपालपुर विकास खंड में तैनात रहे ग्राम विकास अधिकारी कौशलेंद्र सिंह के गौरिया ग्राम पंचायत में नाव की खरीद सहित अन्य कार्यों के नाम पर दो लाख 55 हजार रुपये के घोटाले का मामला सामने आया था। अब अन्य ग्राम पंचायतों में की गई कारस्तानी सामने आने लगी है। हरपालपुर विकास खंड की ग्राम पंचायत सिरसा की प्रधान सरिता देवी के मुताबिक उनकी ग्राम पंचायत निधि के प्रथम खाते से 1 लाख 5 हजार रुपये का भुगतान बालाजी एजेंसी को ट्री गार्ड और सीमेंट खरीदने के नाम पर डोंगल से कर दिया गया। दोनों भुगतानों के सापेक्ष कोई भी सामग्री ग्राम पंचायत में उपलब्ध नहीं है। पूरे मामले की जांच करने वाले जिला पंचायत राज अधिकारी, सहायक अभियंता डीआरडीए और हरपालपुर के बीडीओ के मुताबिक बालाजी एजेंसी को कई भुगतान हुए हैं। यह टायर की एजेंसी है। इसे कौशलेंद्र सिंह से संबंधित बताया गया है। खास बात यह है कि संबंधित प्रधानों ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी डोंगल उनके पास नहीं रहता था। कौशलेंद्र सिंह अपने पास रखते थे।
इनसेट
ग्राम सचिव कोमा में...और हो गया भुगतान
हरपालपुर विकास खंड में तैनात ग्राम विकास अधिकारी मीना सिंह बीती बीस मई को एक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। लखनऊ के एक प्राइवेट अस्पताल में वह कोमा में थीं। 29 मई को एक लाख 26 हजार रुपये की चेक उनके हस्ताक्षर से बालाजी एजेंसी को जारी कर दी गई। यह भुगतान ग्राम पंचायत बर्रा के खाते से हुआ। ग्राम प्रधान नितेश पाठक का दावा है कि कि चेक पर ग्राम सचिव और उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं। जांच कमेटी के मुताबिक हस्ताक्षर की वास्तविकता एक्सपर्ट ही बता पाएंगे।
इनसेट
लैपटॉप खरीदा गया, ग्राम पंचायत के पास नहीं है
पूरे मामले की जांच में यह भी पता चला है कि 12 जनवरी 2020 से 24 जनवरी 2020 तक पांच लाख 29 हजार 510 रुपये का भुगतान/आहरण ग्राम पंचायत बर्रा से किया गया। इसमें 58 हजार रुपये का लैपटॉप खरीदा गया। यह जांच टीम को ग्राम पंचायत में नहीं मिला। 97 हजार 850 रुपये प्रशासनिक मद से खर्च किए गए। कुर्सी, व्हीलचेयर, अलमारी और मेज खरीदी गई। इनका लागत से अधिक भुगतान हुआ है।