प्रतिवर्ष करोड़ों की कमाई देने वाला रेलवे स्टेशन
जिम्मेदारों की मनमानी का शिकार हो गया है। रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन
हजारों लोग सफर करने के बावजूद यात्रियों को टिकट खरीदने के लिए खासी
मशक्कत करनी पड़ती है। रेलवे स्टेशन हो या फिर जनपद के अन्य रेलवे स्टेशन
सभी पर जिम्मेदारों की मनमानी के आगे यात्री बेबस हैं।
रेलवे स्टेशन पर
टिकट बिक्री की दो विंडो होने के बावजूद यात्री एक ही खिड़की के सामने लंबी
लाइन में लगे नजर आते हैं, जिससे कई बार टिकट लेने में यात्रियों की ट्रेन
तक छूट जाती है। इतना ही नहीं बीते दो दिन से स्टेशन का एक कंप्यूटर ही
खराब पड़ा है। जिसको लेकर भी स्टेशन पर यात्रियों की काफी लंबी लाइन लगी
हुई है।
हालांकि, कंप्यूटर को सुधरवाने को स्थानीय अफसरों ने बड़े अफसरों
से संपर्क तो किया, पर फिलहाल अभी समस्या सुलझती नजर नहीं आ रही। रेलवे
अधिकारी टिकट बिक्री की सुविधा तो यात्रियों को दे नहीं पा रहे, वहीं
यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ रहा है।
उधर, रेलवे
विभाग के आंकड़ों की माने तो हरदोईे स्टेशन पर हर वक्त तीन खिड़कियों का
संचालन होता है, जबकि दो आरक्षण काउंटर सुबह आठ बजे से शाम के आठ बजे तक
संचालित होते हैं, पर यदि स्टेशन पर जाकर देखा जाए तो टिकट घरों के संचालन
के आंकड़े में भी हो खेल हो रहा है।
स्टेशन पर मात्र दो खिड़की का
संचालन होता है, जिसमें से भी एक खिड़की अकसर बंद रहती है, जबकि आरक्षण
काउंटर भी एक ही है, जिस पर हर वक्त भीड़ लगी रहती है। एक तो वैसे भी
नियमित रूप से दो टिकट बिक्री काउंटर संचालित नहीं हो रहे।
उस पर भी एक
विंडों का कंप्यूटर खराब हो गया है, जिससे कर्मियों को विंडों संचालन न
करने का और बहाना मिल गया है। कंप्यूटर का थिंक लाइन खराब होने से कंप्यूटर
काम नहीं कर पा रहा है। हालांकि कंप्यूटर को बनाने को इंजीनियर को सूचना
दे दी गई, पर इंजीनियर ने अब कांट्रैक्ट खत्म होने से काम न करने में
असमर्थता जता दी है, जबकि स्थानीय अफसरों ने प्राइवेट इंजीनियरों से काम
कराने से मना कर दिया।
ऐसे में टिकट बिक्री की स्थिति बदहाल बनी हुई है। उधर,
रेलवे स्टेशन की एक विंडों का कंप्यूटर सोमवार की सुबह 11:10 बजे खराब हो
गया था। जिसको पहले तो काफी समय तक सुधारने का प्रयास किया गया, पर जब थिंक
लाइन में सुधार नहीं हुआ तो भीड़ अधिक होने के कारण शाम को छह बजे से रात
के दो बजे तक मैनुअल टिकट बिक्री काउंटर सोमवार को तथा दूसरे कर्मचारी से
रात दो बजे से सुबह तक तथा कुछ देर बाद फिर से मंगलवार को काउंटर का संचालन
कराया गया, जिससे यात्रियों को कुछ राहत तो मिली, पर भीड़ ज्यादा होने से
यात्रियों को टिकट पाने को मारामारी करनी पड़ी।