फोटो- 18- स्टेशन मास्टर कक्ष में लगा ट्रेन रूट पैनल। संवाद
हरदोई। स्थानीय रेलवे स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना से जोड़ते हुए सौंदर्यीकरण तो कराया जा रहा है लेकिन यात्रियों की सुरक्षा पर तनिक भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उच्चाधिकारी निरीक्षण कर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने पर जोर देते हैं। वहीं ट्रेनों का संचालन आज भी दो दशक पुराने पैनलों के भरोसे चल रहा है। वहीं जनपद के संडीला और बालामऊ रेलवे स्टेशन पर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक पैनल लगाए जा चुके हैं।
एक तरफ तो ट्रेनों की गति बढ़ाने और बेहतरी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, हरदोई रेलवे स्टेशन पर अभी भी बीस साल पुराने सिस्टम के भरोसे ट्रेनों को दौड़ाया जा रहा है। स्टेशन मास्टर कक्ष में लगे पैनल अब काफी पुराने हो चुके हैं। रेलवे से जुड़े जानकारों का कहना है कि रेलवे परिचालन से जुड़े उपकरणों का समय पर नवीनीकरण सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील और आवश्यक होता है, लेकिन यहां पर 20 सालों में तकनीकी से संबंधित कोई भी बदलाव नहीं किया गया है।
हरदोई के ही उप नगरों में शामिल संडीला और बालामऊ जैसे-जैसे छोटे स्टेशनों पर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली लागू कर दी गई है। ऐसे में जिला मुख्यालय वाले स्टेशन पर अभी तक पुराने और जर्जर हो चुके पैनलों के भरोसे काम लिया जा रहा है। वहीं, सुरक्षा और संरक्षा के नाम पर होने वाले निरीक्षण महज कागजी साबित होकर रह गए हैं।
आधुनिक प्रणाली लगने से होंगे कई फायदे
हरदोई रेलवे स्टेशन पर आधुनिक प्रणाली लगने से कई यात्रियों को काफी फायदा होगा। जानकारों की मानें तो सबसे पहले तो संचालन पहले से बेहतर हो जाएगा। मानवीय भूल और तकनीकी गड़बड़ी की गुंजाइश न के बराबर हो जाएगी। ट्रेनों के रूट सेट करने और सिग्नलों के आदान-प्रदान में समय की बचत होगी और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम फेल होने की संभावना बहुत कम होती है।
रेलवे स्टेशन पर लगे पैनल पूरी तरह उपयोग लायक हैं, निरीक्षणों में अगर कोई कमी होती है तो उन्हें बदल दिया जाता। पैनलों को बदलने का काम उच्चाधिकारियों के निर्देश पर होता है। जब आवश्यकता लगेगी तब पैनल बदल दिए जाएंगे। नरसी लाल मीणा, स्टेशन अधीक्षक