शहर में बेलगाम होकर चलने वाला यातायात लोगों के लिए
परेशानी का सबब बना हुआ है। यातायात नियमों को दरकिनार कर चलने वाले वाहन
चालकों पर अंकुश नहीं लग पा रहा, जिससे आए दिन कहीं न कहीं जाम लगता रहता
है। शुक्रवार को अराजक यातायात ने पूरे शहर को जाम की झाम में फंसा दिया।
सिनेमा
चौराहे से लगा लखनऊ रोड की ओर जाम ने धीरे-धीरे पूरे शहर को अपनी जद में
ले लिया और शहर का प्रमुख चौराहा होने से सिनेमा चौराहे से लगा जाम सोल्जर
बोर्ड चौराहा, अस्पताल तिराहा, लखनऊ चुंगी तथा बड़ा चौराहा एवं सिनेमा
चौराहा तक पहुंच गया। मध्याह्न करीब 12 बजे लगा जाम काफी देर तक लगा रहा।
एक ओर जाम खुलता तो दूसरी ओर लग जाता, जिससे काफी देर तक जाम लगा रहा और
लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यातायात कर्मी यातायात को सामान्य
कराने के लिए मशक्कत करते रहे, मगर यातायात घंटो रेंगता दिखाई पड़ा। देर
दोपहर बाद यातायात सामान्य हुआ तब लोगाें ने राहत की सांस ली।
ज्ञात हो कि
बढ़ते वाहनों की संख्या के साथ ही बेलगाम होकर चलने वाला यातायात जाम की
झाम से कराहता रहता है। जाम के कारण किसी की ट्रेन छूट जाती है, तो कोई
आफिस के लिए लेट हो जाता है, पर इसके बाद भी शहर में यातायात को व्यवस्थित
करने के लिए न तो बाईपास बन पा रहा और न ही डिवाइडर बन पा रहे, जिससे जाम
की झाम से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है।
शहर की सड़कों पर यातायात का दबाव
काफी बढ़ गया है। जिसके चलते जाम की झाम से पूरा शहर कराहता रहता है। अहम
बात यह है कि नियमों को ताक पर रखकर बेलगाम होकर चलने वाले यातायात से
लोगों की मुश्किलें और बढ़ जाती है। अराजक होकर चलने वाले यातायात से एक ओर
जहां जाम लगता है, तो दूसरी तरफ दुर्घटनाओं की आशंका में लोग सड़कों पर
चलने के दौरान सहमें सहमे नजर आते हैं।
डिवाइडर न बनाने से अराजक
यातायात की समस्या का समाधान होता नजर नहीं आ रहा है। सड़कों पर स्थायी
डिवाइडर बना दिए जाएं, तो कम से कम लोगों को सड़क पार करने से लेकर उन पर
चलने में काफी सुविधा हो सकती, पर फिलहाल इस ओर कोई पहल होती नजर नहीं आ
रही है।