जब तक समाज के सभी वर्गों का सहयोग एवं भूमिका
निश्चित नहीं होती। तब तक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आशातीत वृद्धि नहीं
की जा सकती। उच्च शिक्षा में नीतिगत परामर्श को लेकर महाराणा प्रताप
स्नातकोत्तर महाविद्यालय के तत्वावधान में पालिका सभागार में गुरुवार को
आयोजित गोष्ठी में जिला समन्वयक मीना श्रीवास्तव ने यह बात कही।
कहा कि
उच्च शिक्षा में गुणवत्ता एवं पारदर्शिता लाने को सरकार एवं शासन की तरफ
से नीतिगत परामर्श की अपेक्षा की गई है। कहा कि अभिशासन सुधार तथा संबद्धता
के विषय में यह तथ्य सामने आया है कि गवर्नेंस तथा संबद्धता प्रक्रिया को
और अधिक पारदर्शी किया जाए। जवाबदेही के साथ आर्थिक एवं प्रशासनिक
स्वायत्तता से शिक्षा में सुधार होगा।
कहा कि लाभान्वित वर्ग के छात्र
छात्राओं की फीस माफ करने के पक्ष में भी लोग हैं, पर सक्षम छात्र-छात्राओं
से अधिक फीस लेने का परामर्श कम लोग ही दे पा रहे हैं। नोडल अधिकारी आरके
मिश्रा ने कहा कि क्षेत्रीय असमानता व भाषा की समस्या काउंसिलिंग द्वारा
दूर किया जा सकता है।
कहा कि लाभान्वित वर्ग के छात्र-छात्राओं को उच्च
शिक्षा में प्रेरित करने के लिए उन्हें यातायात सुविधा के साथ साथ आर्थिक
मदद भी देनी होगी। इस दौरान वहां मौजूद बुद्धिजीवियों ने अपनी अपनी राय दी।
जिसमें उत्कृष्ट शिक्षा के लिए प्रवक्ताओं का चयन कमीशन द्वारा कराने,
समग्र विकास के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों को पाठ्यक्रमों के साथ जोड़ने
आदि का भी परामर्श दिया गया। इस मौके पर डा. पवन चौहान, डा. राजेश सोनकर के
अलावा चिकित्सक, टीचर, अभिभावक आदि मौजूद थे।