फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टडिय़ावां के अयारी को पार कर घने जंगल में गया बाघ

विज्ञापन
ग्राम अयारी में बाघ के पंजों के निशान देखते वन विभाग के अधिकारी। संवाद - फोटो : HARDOI
विज्ञापन
टड़ियावां। छह दिन से जनपद में दहशत का पर्याय बने बाघ की खोज वन विभाग के कर्मचारी बावन क्षेत्र मेेें करते रहे और शुक्रवार को बाघ टड़ियावां क्षेेत्र के ग्राम अयारी जा पहुंचा। वन विभाग की टीम ने अयारी के आगे घने जंगल में बाघ की तलाश की लेकिन रात में टीम लौट आई।
विज्ञापन

शुक्रवार दोपहर टड़ियावां थाना क्षेत्र के ग्राम अयारी के निकट चक मार्ग के पास स्थित खेत में बाघ के पंजे के निशान देखकर ग्रामीणों ने पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। इस पर हरदोई क्षेत्र के रेंज अफसर रत्नेश श्रीवास्तव, प्रभागीय निदेशक वन विमल कुमार आनंद, वन्य जीव विशेषज्ञ डॉ. आरके सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने बाघ के पंजे के निशान की नाप ली। आगे और पीछे के पंजों के बीच की लंबाई लगभग 51 इंच निकली।
वन विभाग की टीम ने अयारी के आगे घने जंगल में बाघ की तलाश की। काफी देर तक तलाश की गई, लेकिन फिर रात होने पर टीम लौट आई। रेंज अफसर के मुताबिक बाघ लगातार चल रहा है और इसलिए पिंजड़ा रखवाने या फिर नाइट विजन कैमरा लगवाने का कोई फायदा नहीं मिल रहा। अगर बाघ किसी जंगल या खेत मेें रुके तो पिंजड़ा रखवाया जाए।
विज्ञापन

22 किमी चल चुका बाघ, लखीमपुर की ओर जा रहा
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बावन के भुवनपुरवा से बाघ धीरे-धीरे मोहम्मदी लखीमपुर खीरी की ओर बढ़ रहा है। रेंज अफसर रत्नेश श्रीवास्तव के मुताबिक बाघ ने रात में लगभग 22 किलोमीटर का सफर तय किया है। गन्ने के खेत में भी बाघ की लोकेशन पंजे के निशान के आधार पर कुछ दूर तक मिली है। इसके आगे भी घने जंगल हैं, जो कि गोमती नदी के किनारे की ओर तक हैं। बाघ कभी भी अपने रास्ते पर पलटता नहीं है। बाघ जिस तरह से फर्रुखाबाद से जिले की सीमा में आया और लखीमपुर जनपद की ओर बढ़ रहा है, उससे वापसी की उम्मीद को बल मिला है। खास बात ये है कि बाघ यू शेप में वापस लखीमपुर की ओर जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें