संवाद न्यूज एजेंसी
हरदाेई। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद यहां पर स्वास्थ्य सेवाओं व सुविधाओं में इजाफा तय है। थायरायड की मशीन का ट्रायल तो हो गया, लेकिन 30 लाख की कीमत के केमिकल की अभी तक डिमांड नहीं की जा सकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि करीब एक माह पहले स्थापित कराई गई मशीन से थायरायड की जांच की सुविधा व सहूलियत यहां के मरीजों को कब मिलेगी। जिम्मेदारों ने तो अभी तक 30 लाख के केमिकल (रीजेंट) की आपूर्ति के लिए पत्र तैयार कराना शुरू किया है।
मेडिकल कॉलेज के अधीन जिला चिकित्सालय की पैथालाॅजी में थायरायड की जांच के लिए मशीन लगवाई गई है। 15 दिनों से थायराइड मशीन का ट्राॅयल चल रहा था। मंगलवार को मशीन का ट्राॅयल पूरा हो गया। मशीन को चलाने के लिए पैथोलॉजी विभाग में तैनात लैब टेक्नीशियन को प्रशिक्षित भी किया गया है। थायराइड की जांच के लिए मशीन से जांच के लिए रीजेंट की जरूरत पड़ती है, इसके लिए मेडिकल कॉलेज की ओर से करीब 30 लाख रुपए का डिमांड लेटर तैयार कराया जा रहा है।
बताया गया कि 30 लाख रुपये के केमिकल से करीब छह महीने तक जांच काम किया जा सकेगा। मरीजों की संख्या बढ़ने पर बीच में भी केमिकल को मंगाया जा सकता है। थायरायड मशीन संचालन के लिए राधेश्याम व केडी को प्रशिक्षित किया गया है जबकि मशीन की देखरेख का पीओ सिटी सर्विसेज कंपनी को ठेका मिला है।
प्राइवेट जांच में ढीली करनी पड़ रही जेब
जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन 1400 से 1500 की ओपीडी होती है। वहीं मेडिसीन विभाग में 250 से 300 मरीज प्रतिदिन आते हैं। इनमें से अधिकतर मरीजों को चिकित्सक खून की जांच लिखते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिदिन लगभग 60 से 80 मरीजों को थायरायड की जांच लिखि जाती है। ऐसे में अस्पताल में थायरायड की मशीन के होते हुए भी बाहर महंगी जांचों में जेबे ढीली करनी पड़ रही है। लोगों ने बताया कि थायराइड की जांच के लिए 800 से 1000 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। हालांकि मेडिकल कॉलेज में भी थायराइड की जांच के लिए कुछ फीस निर्धारित की जाएगी।
वर्जन
थायराइड मशीन का ट्रायल पूरा हो चुका है। इसके चलाने के लिए रीजेंट के लिए डिमांड लेटर बन गया है। रीजेंट प्राप्त होती ही 15 दिन के अंदर जांच शुरू हो जाएगी।
डॉ. आर्य देश दीपक, प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज