हरदोई। झांसी के मेडिकल कॉलेज में आग लगने के पीछे की वजह शाॅर्ट सर्किट है।
शाॅर्ट सर्किट से ऑक्सीजन पाइपों की मदद से पूरा वार्ड शोलों में तब्दील हो गया। इतने बड़े हादसे पर स्थानीय मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने सबक नहीं लिया। मेडिकल कॉलेज में पड़ताल के दौरान आईसीयू वार्ड में ऐसा ही मामला दिखा। आईसीयू वार्ड में ऑक्सीजन प्वाइंट के बिल्कुल नजदीक बिजली का बोर्ड खुला मिला और उसमें से तार भी बाहर निकले थे। इससे अनहोनी की आशंका हर वक्त बनी रहती है। इसके अलावा वार्डों में अग्नि सुरक्षा को लेकर भी इंतजाम नहीं हैं। वार्ड में अग्निशमन यंत्र ढूंढे नहीं मिल रहे हैं और जहां अग्निशमन यंत्र लगे हैं, वह भी धूल फांक रहे हैं। अग्निशमन यंत्रों में रिफिलिंग तो दूर लगाने के बाद उन्हें कभी साफ भी नहीं किया गया।
दृश्य-1- मेडिकल काॅलेज की जैसी हड्डी वार्ड की इमारत सड़क के दूसरी ओर भी बनी हुई है। वार्ड तो अधिकारियों की उदासीनता का शिकार है, वहीं वार्ड में आग बुझाने के कोई संसाधन भी मौजूद नहीं हैं। वार्ड के आसपास हाईड्रेंट प्वाइंट नहीं हैं, अंदर एक भी अग्निशमन यंत्र नहीं लगा है। वार्ड के स्टाफ से अग्निशमन यंत्र के बारे में पूछताछ की गई तो उन्हें भी एक भी सिलिंडर ढूंढने के बाद भी नहीं मिला।
दृश्य-2- सबसे बड़ी लापरवाही तो मेडिकल कॉलेज के अंदर आईसीयू वार्ड में देखने को मिली। आईसीयू वार्ड में एक बेड के पास बिजली का बोर्ड बाहर लटका मिला और उसके तार भी जर्जर दिखे। जिम्मेदारों की अनदेखी तो यह है कि वहीं पर आक्सीजन प्वाइंट भी लगा है और उस बेड पर मरीज भी भर्ती हैं। ऐसे में एक थोड़ा सा शाॅर्ट सर्किट ऑक्सीजन से मिलकर बड़ी आग फैला सकता है, लेकिन जिम्मेदारों को यह लापरवाही दिखाई नहीं दे रही है।
दृश्य-3- एक तो वार्डों में अग्निशमन यंत्र नहीं हैं और जहां पर उपकरण रखे हैं, वहां की स्थिति अत्यंत दयनीय है। मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी के अंदर रखे यह उपकरण फिलहाल तो यही स्थिति बयां कर रहे हैं। लगातार अधिकारियों को संज्ञान में देने के बाद भी सिलिंडरों को जांचना तो दूर उनमें हाथ नहीं लगाया गया। सिलेंडरों के चारों ओर कीड़े और मकोड़ों ने अपना घर बना रखा है। आपात स्थिति में यह प्रयोग आएंगे यह भी संशय है।
दृश्य-4- पैथोलॉजी में ही जहां पर अग्निशमन यंत्र के सिलिंडर रखे हुए हैं। वहीं पर ही नजदीक ही यह तारों का जाल फैला हुआ है। तारों की अवस्था देखकर ही लग रहा है कि इनमें शाॅर्ट सर्किट कब हो जाए, कोई नहीं जानता है। झांसी में शॉर्ट सर्किट की वजह से ही हादसा हुआ है इसके बाद भी यहां की पैथोलॉजी में तार सुव्यवस्थित ढंग से नहीं लगाए गए हैं।
नई इमारत के वार्ड में आग से बचाव के सभी उपकरण हैं और पुराने वार्ड में भी अभी 40 सिलिंडर हैं। 100 की डिमांड और की गई है। जहां पर कोई कमी है उसे दुरूस्त कराया जा रहा है। सिलिंडरों की साफ-सफाई भी अगर नहीं हो रही है तो उसे भी कराया जाएगा। -डॉ. जेके वर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक