हरदोई। इस बार जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजित सिंह खुद को नहीं बचा पाए। सियासी आका, विभागीय तिकड़म और रसूख भी इस बार काम नहीं आया। दरअसल डॉ. अजित सिंह के खिलाफ पूर्व में भी गंभीर शिकायतें मिलने पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई थी। तब वह खुद का निलंबन बचा ले गए थे, लेकिन विभागीय जांच शुरू हो गई थी।
जिले में लगभग सात माह तक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रहे डॉ. अजित सिंह ने तैनाती के साथ ही तेवर दिखाने शुरू कर दिए थे। एक काकस से घिरे डॉ. अजित न तो विभागीय नियमों की चिंता कर रहे थे और न ही शासनादेश की। कई ऐसे मामले आए जब उन पर जान बूझकर विशेष प्रयोजन से पत्रावलियां लंबित रखने के आरोप लगे।
साक्षरता और वैकल्पिक शिक्षा के निदेशक ने 22 अगस्त 2025 को बजट का आवंटन और दिशा निर्देश जारी किए थे। इसके बाद भी लगभग छह माह बाद 28 फरवरी 2026 को यह पत्रावली तत्कालीन सीडीओ को भेजी गई थी। जब यह पत्रावली देखी गई तो पता चला कि 18.40 के सापेक्ष 18.39 लाख के बजट से क्रय प्रस्ताव तैयार किए गए, लेकिन इसकी पत्रावली भी सही नहीं थी। वित्त एवं लेखाधिकारी से जांच कराए बिना ही पत्रावली भेज दी गई थी।
इसके अलावा 210 परिषदीय विद्यालयों में को लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में ईसीसीई एजुकेटर की भर्ती के लिए सेवा प्रदाता के चयन की कार्रवाई भी लंबित रही। 24 नवंबर 2025 को फर्म का चयन होने के बाद भी उसे 19 दिसंबर 2025 तक कार्यादेश ही नहीं दिया गया। एआरपी चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी इसे बीएसए कार्यालय में लंबित रखा गया और नियुक्ति आदेश जारी नहीं हुआ। जबकि यह प्रक्रिया 10 दिसंबर 2025 को पूरी कर ली गई थी, लेकिन 19 दिसंबर तक पत्र जारी नहीं हुए थे। इसी तरह कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अलमारी और सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन की खरीद को लेकर बुलाई गई बैठक में बीएसए खुद 20 मिनट की देरी से पहुंचे, जबकि बैठक के लिए बीएसए ने ही समय लिया था। इन सब बिंदुओं पर तत्कालीन सीडीओ ने जिलाधिकारी अनुनय झा को रिपोर्ट दी थी।
शासन को यही रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई की संस्तुति भी हुई थी। इसका पता चल जाने पर बीएसए ने अपने सियासी आकाओं के साथ ही विभागीय तिकड़म भी भिड़ा दिया था। इसके कारण उनका निलंबन नहीं हुआ था और संयुक्त निदेशक से उनके खिलाफ जांच कराई जा रही थी। इस बार बीएसए को बचने का कोई मौका नहीं मिला। जिला प्रशासन के पास उनकी ज्यादातर अनियमितताओं के पुख्ता प्रमाण थे। यही वजह थी कि बीएसए का निलंबन तय माना जा रहा था।
इस बार इन बिंदुओं पर फंसे
. न्यायालय के आदेश पर जिले में हुईं 61 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति संबंधी मूल पत्रावली गायब मिली
. बीएसए के आवास पर महत्वपूर्ण पत्रावलियां होने की आशंका जांच टीम ने जताई
. वेतन वृद्धि से लेकर पेंशन तक की 46 पत्रावलियां लंबित मिली
. सेवानिवृत्त खंड शिक्षा अधिकारी तक की पत्रावली एक साल से लंबित मिली
. खंड शिक्षा अधिकारियों के तबादला भत्ता से लेकर बकाया वेतन बिल तक लंबित मिले
भ्रष्टाचार के आरोपों से भी घिरे
सेवानिवृत्त सहायक अध्यापक मनोज कुमार ने डीएम से शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि पेंशन पत्रावली बनाने के नाम पर उनसे बीस हजार रुपये मांगे गए। जांच के दौरान उनकी पेंशन पत्रावली काफी खोजने पर भी नहीं मिली। इससे इतर ईसीसीई एजुकेटर भर्ती के लिए नामित सेवाप्रदाता फर्म के अध्यक्ष की शिकायत पर बीएसए के खिलाफ रिश्वत में पांच लाख रुपये मांगने और दो लाख रुपये ले लेने की प्राथमिकी भी शहर कोतवाली में दर्ज है। हालांकि डॉ. अजीत सिंह सभी आरोपों को गलत ही बताते रहे।