हरदोई। जिला मुख्यालय को छोड़कर जनपद में कहीं भी ब्लॉक और तहसील स्तर पर रोडवेज बसों के लिए स्टेशन अभी तक नहीं बने हैं। बस स्टेशन न होने से बसे सड़क किनारे ही खड़े होकर यात्रियों को उतारती व बिठाती हैं।
सड़क पर खड़ी हो रही बसों के कारण जाम की स्थिति तो बनी है। हादसे का अंदेशा भी लगा रहता है। इतना ही नहीं यात्रियों को भी धूप और बारिश में खुले आसमान के नीचे ही बसों के इंतजार में खड़े होना पड़ता है। जनपद में कई बड़े नगर क्षेत्र होने के बावजूद रोडवेज या फिर संबंधित नगर क्षेत्र के जिम्मेदार बस स्टेशन बनाने के प्रति कोई कवायद नहीं कर रहे हैं।
सीन-1-
हरदोई से फर्रुखाबाद सहित इटावा, आगरा और दिल्ली के लिए दिन में कई बसें जाती हैं। हरदोई से निकलने के बाद तहसील क्षेत्र सवायजपुर ही बड़ा नगर क्षेत्र है। यहां से रोजाना दो से ढाईं हजार सवारियां आवागमन करती हैं। यहीं से हरपालपुर के लिए भी बस बदलनी भी पड़ती है। सवायजपुर आने वाली बसें सड़क के किनारे ही बसों को चढ़ाती व उतारती हैं। तहसील के पास ही सड़क पर बसें रुकने से जाम तो लगता है यात्रियों संग अनहोनी की आशंका भी बनी रहती है। जबकि सवायजपुर में बस स्टेशन बनाने को जगह भी देखी जा चुकी है लेकिन प्रस्ताव फाइलों में ही दबकर रह गया।
सीन-2-
हरदोई से लखनऊ जाने के दौरान 55 किलोमीटर बाद संडीला नगर क्षेत्र आता है। संडीला औद्योगिक क्षेत्र भी है और यहां रोजाना चार हजार से अधिक यात्री लखनऊ और हरदोई के लिए आवागमन करते हैं। इसके अलावा भरावन और कानपुर के लिए भी संपर्क मार्ग होने की वजह से यात्री अधिक होते हैं। अधिक संख्या में यात्री होने के बावजूद संडीला में बस स्टेशन नहीं है। इतना ही नहीं नगर क्षेत्र के जिम्मेदारों ने यात्री प्रतीक्षालय तक नहीं बनाया है। हाईवे के ओवर ब्रिज को ही अस्थाई बस स्टेशन बना लिया गया है और वहीं से सड़क पर यात्रियों को बिठाया जाता है। वातानुकुलित इलेक्ट्रिक बसें भी ठिकाना बनाए हैं।
सड़ीला में बस स्टेशन बनाने को जमीन ली गई थी लेकिन वह हाईवे में चली गई। हरपालपुर में भी जमीन देखी जा चुकी है। शाहाबाद और पाली में काम शुरू हुआ था लेकिन अभी आगे कोई कवायद नहीं हो रही है। शासन को जानकारी भेजी जा चुकी है। -एमएल केसरवानी, क्षेत्रीय प्रबंधक, हरदोई