रूठे मानसून से परेशान किसानों को अब बिजली संकट से
भी जूझना पड़ रहा है। हालात यह है ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की पर्याप्त
आपूर्ति न मिलने से नलकूप बंद पड़े हैं। इसका असर खरीफ की फसल पर पड़ रहा
है। किसान मजबूरन निजी नलकूपों से महंगा पानी लेने को विवश हैं।
किसानों की
माने तो क्षेत्र में बमुश्किल दो से चार घंटे की बिजली आपूर्ति मिल रही,
जिससे फसलें सूख रही हैं। सदर तहसील क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में
बिजली की सप्लाई बदहाल होती जा रही है। हरियावां, सुरसा, टड़ियावां, बावन
समेत अन्य विकास खंड क्षेत्रों के गांवों में बिजली की आपूर्ति शेड्यूल के
अनुसार न मिलने से नलकूप बंद पड़े हैं।
ऐसे में किसान निजी नलकूपों से 120
रुपये प्रति घंटे की दर से पानी लेने को मजबूर हैं। सवायजपुर क्षेत्र के
हरपालपुर, भरखनी खंड के गांवों मेें हालात और भी खराब हैं। इकनौरा गांव के
राजकु मार, मान सिंह यादव, बढ़ैयनपुरवा के मथुरा प्रसाद, पलिया के कृष्ण
प्रसाद तिवारी का कहना है कि बमुश्किल दो से तीन घंटे ही बिजली मिलती है।
ऐसे में खेत में खड़ी मक्का और धान की फसल सूख रही, वहीं गन्ना भी पानी समय
पर मिलने से प्रभावित हो रहा। उन्होंने कहा कि अबकी बारिश कम होने से
स्थिति और खराब हो गई है। बिलग्राम तहसील मुख्यालय पर भले ही छह से सात
घंटे सप्लाई मिल रही, पर ग्रामीण क्षेत्रों में तीन से चार घंटे आपूर्ति
दी जा रही है।
मल्लावां क्षेत्र में विद्युत आपूर्र्ति का शेड्यूल सुबह
पांच से सात और साढ़े नौ से शाम साढ़े पांच बजे तक निर्धारित है, पर
बमुश्किल तीन घंटे सप्लाई मिल पा रही है। इससे खेतों में खड़ी फसल सूख रही
है। संजय शुक्ला, सुशील सिंह व शिवकुमार त्रिपाठी आदि ने बताया कि लोग निजी
नलकूप से महंगा पानी लेकर सिंचाई कर रहे हैं।
इधर, सांडी क्षेत्र में भी
स्थिति बदहाल है। कसबे में छह से सात घंटे सप्लाई मिल रही, वहीं ग्रामीण
क्षेत्रों में दो से तीन घंटे बिजली मिल रही। इसमें भी लो-वोल्टेज से
उपभोक्ता परेशान हैं। कामर्शियल उपभोक्ताओं का कहना है कि सप्लाई न मिलने
पर भी उन्हें 688 रुपये न्यूनतम शुल्क देना पड़ रहा है।
उधर, शाहाबाद
में 132 केवी उपकेंद्र शुरू होने के बावजूद उपभोक्ताओं को ट्रिपिंग से
जूझना पड़ रहा है। नगर में करीब पांच से छह घंटे व ग्रामीण क्षेत्राें में
दो से तीन घंटे ही सप्लाई मिल पा रही। इससे लोग परेशान है। शहर के
उपभोक्ताओं ने एसडीएम अशोक शुक्ला को ज्ञापन देकर विद्युत व्यवस्था
सुधरवाने की मांग की थी।
उधर, संडीला क्षेत्र में आपूर्ति सुुधार का दावा
किया जा रहा, पर हकीकत यह है कि उपभोक्ताओं को अघोषित कटौती से जूझना पड़
रहा है। भरावन, बेहंदर, कछौना, कोथावां ब्लाक से जुड़े गांवों में बमुश्किल
चार घंटे बिजली मिल पा रही, जिससे किसान बेहाल हैं।