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गैर यादव बिरादरी के वोट जीत की राह करेंगे आसान

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हरदोई। पासी बहुल बालामऊ विधानसभा सीट में भाजपा, सपा व बसपा ने पासी प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। ऐसे में पासी वोट के लिए प्रत्याशियों में खींचतान है।
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प्रत्याशी व उनके समर्थक पासी वोट को साधने में दिन-रात एक कर रहे हैं। राजनीतिक पंडितों की मानें तो यहां गैर यादव पिछड़ा वोटर करीब 87 हजार के आसपास है। यह वोट प्रत्याशी की जीत की राह आसान करेगा।
यहां जिले के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर है। चुनावी अखाड़े में बारहवीं बार उतरे आठ बार के विधायक रहे और पूर्व राज्यमंत्री रामपाल वर्मा नौवीं बार चुनावी अखाड़े में हैं।
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गांव की पंचायत से लेकर देश की पंचायत तक में उनके परिवार का प्रतिनिधित्व है। उनकी पत्नी ग्राम प्रधान, पुत्र ब्लाक प्रमुख व सांडी से विधायक भतीजे प्रभाष कुमार फिर से मैदान में हैं।
भतीजे अशोक रावत मिश्रिख लोकसभा से सांसद हैं। 2008 में हुए परिसीमन में बेनीगंज (सुरक्षित) विधानसभा से भरावन ब्लाक व कोथावां का कुछ हिस्सा अलग होने व बेहंदर जुड़ने के बाद बालामऊ (सुरक्षित) सीट अस्तित्व में आई थी।
1967 में बनी बेनीगंज विधानसभा से पहली बार जनसंघ के ए लाल विधायक बने। 1969 में बीकेडी के सुकरू लाल ने 14,311 मत पाकर कांग्रेस के निरंजन को 1,630 मतों से हराया।
1974 में अंगनेलाल ने जनसंघ को दोबारा जीत दिलाई। इस बार रनर रहे कांग्रेस के बिहारीलाल हंस ने 1977 के चुनाव में जनता पार्टी के उम्मीदवार अंगनेलाल को 1,653 मतों से पराजित किया।
2081 वोट पाकर चौथे स्थान पर रहे कुबेर के भाई रामपाल वर्मा ने 1980 के चुनाव में राजनीति में कदम रखा। पहले ही चुनाव में 10628 वोट हासिल कर निर्दलीय बिहारीलाल हंस को 2153 वोट से हराया।
1985 में रामपाल वर्मा ने निर्दलीय लड़कर 21118 वोट पाकर कांग्रेस के चतुरीलाल को 6219 वोट पराजित किया। 1989 में कांग्रेस से उतरे रामपाल वर्मा ने निर्दलीय बुद्धालाल को 11,252 वोट से हराकर जीत की हैट्रिक लगाई। 1991 की रामलहर में रामपाल ने भाजपा के बुद्धालाल को 1,328 वोट से हराकर चौथी बार जीत का स्वाद चखा।
1993 में नवगठित सपा की प्रत्याशी सुशीला सरोज ने रामपाल वर्मा का विजय रथ रोक दिया। उन्होंने 40,064 वोट हासिल कर भाजपा के प्रेमचंद्र को 8,926 वोट से पटकनी दी।
इस चुनाव में रामपाल 28,357 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। 1996 में कांग्रेस छोड़ सपा से मैदान में उतरे रामपाल वर्मा ने 51,835 वोट पाकर भाजपा की सुशीला सरोज को 14,122 वोट से करारी शिकस्त दी।
2002 में बसपा के सत्यनारायण संतू ने रामपाल वर्मा को 3,900 वोटों से हरा दिया। इस चुनाव में 23,055 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहीं बीजेपी की वर्षा गौतम खूब चर्चा में रहीं।
2004 में राजनीतिक उठा पटक के बीच संतू ने अतरौली में एक मीटिंग कर सरकार के विपक्ष में होने के कारण विकास न करवा पाने की बात कहते हुए इस्तीफे की घोषणा कर दी।
इस्तीफे के बाद हुए उपचुनाव में सपा से मैदान में उतरे संतू को बसपा के रामपाल वर्मा ने धूल चटा दी। 2007 में बसपा से रामपाल वर्मा ने भाजपा के रमेश को 10,680 वोट से हरा दिया।
2012 में अस्तित्व में आई बालामऊ सीट से सपा के अनिल वर्मा और बसपा के रामपाल वर्मा के बीच कांटे की टक्कर हुई। आखिरी राउंड तक चली ऊहापोह ने लोगों की सांसे थामें रखी।
अनिल वर्मा ने 67,800 वोट हासिल कर रामपाल वर्मा को 173 वोट से हरा दिया। 2017 में मोदी लहर में भाजपा की नाव पर सवार हो रामपाल वर्मा ने आठवीं (उपचुनाव को मिलाकर) जीत दर्ज कर भाजपा का खाता खोला।
उन्होंने बसपा की नीलू सत्यार्थी को 22,888 वोट से हरा दिया। सपा की सुशीला सरोज 43,507 वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहीं।
अबकी चुनाव मैदान में ये प्रत्याशी
रामपाल वर्मा भाजपा से, तिलकचंद्र पासी बसपा से, रामबली वर्मा सपा से, सुरेंद्र कुमार कांग्रेस से, पीयूष प्रेमी आप से, रामकृष्ण भाशचेपा से, निर्दलीय अनीता देवी, मनोज कुमार वर्मा व सुशीला देवी बालामऊ विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं।
अनुमानित जातीय आंकडे़
पासी-80,000, जाटव-66,000, कुशवाहा/मौर्य/शाक्य/सैनी-24,000, ठाकुर-23,000, ब्राह्मण-21,000, वैश्य-18,000, मुस्लिम-16,500, कुर्मी-12,000, निषाद/केवट/कश्यप-12,000, तेली-10,000, धोबी-8,000, सक्सेना/भुर्जी-6,000, नाई/बढ़ई/जोगीरा/लोहार-6,000, प्रजापति-5,000, पाल-5,000, कायस्थ-5,000, जायसवाल/कलवार-5,000, बाल्मीकि-3,000, सोनकर/धानुक-2,500, कोरी-2,000, आरख-1,000, लोधी-500
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