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Hardoi News: बाबटमऊ के गट्टा की मिठास और खुशबू ने कन्नौज में बनाई जगह

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फोटो 35 : शक्कर के ​खिलौना व गटिया बनातीं समूह की महिलाएं। स्रोत : विभाग
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हरदोई। शक्कर के गट्टा, गटिया, बताशा और खिलौना बनाकर महिलाओं ने आत्मनिर्भर बनने की राह चुनी। शुरू में तो दिक्कतें आईं लेकिन अब उनके बनाए गट्टे की मिठास और खुशबू ने कन्नौज में भी जगह बना ली है।
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विकास खंड माधौगंज के बाबटमऊ में महिलाओं ने घर के कामकाज से आगे बढ़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़ने का काम किया। गांव की महिलाओं को जोड़कर स्वयं सहायता समूह बनाया। गांव की सुमन ने बताया कि करीब 11 महिलाओं को जोड़कर साल 2019 में महेश आजीविका स्वयं सहायता समूह बनाया। दो साल तक बचत और छोटे-छोटे काम किए। आर्थिक रूप से मजबूत होने पर मिशन से भी रुपये मिले। करीब तीन साल पहले शक्कर के गट्टा, गटिया, बताशा और खिलौना बनाने का काम शुरू किया। समूह की अध्यक्ष सुमन ने बताया कि उनके साथ सचिव कंचन, कोषाध्यक्ष आकांक्षा के साथ समूह की महिलाएं काम करती हैं।
बताया कि गटिया, बताशा और खिलौना तो सामान्य ही बनाए जाते हैं लेकिन गट्टा में कई प्रकार की खुशबू वाले और मेवा लगाए जाते हैं। उन गट्टों की मांग कन्नौज में अधिक होती है। बताया कि कन्नौज के साथ ही जिले के माधौगंज, बिलग्राम, उन्नाव के बांगरमऊ आदि कस्बाें में भी गट्टा के साथ ही अन्य उत्पादों की बिक्री की जाती है। बताया कि इस काम ने घर के कामकाज से बचे समय के सदुपयोग के साथ ही आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है।
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स्वयं सहायता से महिलाओं को जोड़कर न केवल उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है बल्कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा भी देना है। प्रधानमंत्री ने लोकल फॉर वोकल में स्थानीय उत्पादों पर जोर दिया है। बाबटमऊ में महिलाओं की तरफ से बनाए जा रहे शक्कर के गट्टा, गटिया, बताशा और खिलौना उनके जीवन में आर्थिक समृद्धि ला रहे हैं। महिलाओं के समय का सदुपयोग हो रहा है और वह आत्मनिर्भर बन रही हैं। -सान्या छाबड़ा, सीडीओ
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