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Hardoi News: दुश्मन आइ गवा... के शोर से हुआ था सरपंच पर हमला, शोर शांत हुआ तो खत्म हो चुकी थी जिंदगी

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हरदोई। दुश्मन आइ गवा... कुछ यही शोर सोमवार सुबह बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के भैनगांव में गूंजा।
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जब शोर शांत हुआ तो 16 साल पहले हत्या के आरोप में जेल जा चुका शख्स मरणासन्न हो चुका था और अस्पताल ले जाते ही उसे मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज करते हुए 18 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इन्हें पुलिस बस से बेनीगंज से न्यायालय लाकर पेश किया गया। सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया। अभी इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के भैनगांव निवासी सरपंच ने अपने भाई बबलू के साथ मिलकर 28 अगस्त 2009 को गांव के ही रामपाल की पीट पीटकर हत्या कर दी थी। मामले में 14 साल तक जेल में रहने के बाद सरपंच छूट गया था। तब से वह वापस गांव नहीं आया और लखीमपुर खीरी के पलियापुरवा में परिवार समेत रहने लगा था। 28 अगस्त 2009 को हुई घटना के बाद सोमवार सुबह वह फेरी लगाने पैदल ही भैनगांव पहुंचा था।
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रामपाल के कुनबे के कुछ लोग भैनगांव में ही रहते हैं, जबकि परिवार के लोग 700 मीटर दूर अटिया के नटपुरवा में रहते हैं। सरपंच के गांव आने की जानकारी पर दुश्मन आइ गवा का शोर मचा। कुछ ही देर में बाइकों पर सवार होकर महिला पुरुष भैनगांव पहुंच गए। इन लोगों ने घेरकर लाठी-डंडों से सरपंच की पीट पीटकर हत्या कर दी थी। विवाद की सूचना पर पहुंची पुलिस ने सरपंच को बचाने का प्रयास भी किया, लेकिन 25-30 लोगों की भीड़ के आगे पुलिस कर्मी नाकाफी साबित हुए।


महिलाओं समेत 18 आरोपी गिरफ्तार, सीसीटीवी फुटेज से की गई पहचान
पुलिस ने सरपंच की हत्या में उसकी पत्नी निर्मल की तहरीर पर 12 लोगों को नामजद करते हुए 25-30 अज्ञात पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस ने इस मामले में रामपाल के पुत्र बीरू, राहुल और धीरू और बीरू की पत्नी चांद को गिरफ्तार किया है। इसी घटना में वियाजन और उसके पुत्र किशोर व किशोर की पत्नी सरवत्तो, मोईन की पत्नी नीता, रूप, लीला, उसके पुत्र सलमान और सलमान की पत्नी हौसला, हरिपाल, लीला, जब्बर की पत्नी मनीषा, गोपी की पत्नी उपासना उर्फ जुलानिया, गांव के ही आजाद और इंतजारी को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सीसीटीवी फुटेज के जरिये आरोपियों की पहचान पुलिस ने की है।
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सोचा था.... सब भूल गए होंगे... यही गलतफहमी निकली
सरपंच की पत्नी निर्मल बताती हैं कि पैदल ही फेरी लगाते थे। लखीमपुर से निकलकर सीतापुर और नैमिषारण्य के रास्ते सरपंच भैनगांव पहुंच गए थे। निर्मल का कहना था कि सरपंच को लग रहा था कि गांव में सब लोग उसे भूल गए होंगे। कोई पहचान नहीं पाएगा। बस यही गलतफहमी निकली। गांव में पहुंचते ही बिरादरी के लोगों ने पहचान लिया और फिर दुखद घटना हो गई।
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