यूपी बोर्ड की परीक्षा के मूल्यांकन की समयावधि
शनिवार को समाप्त हो रही है, मगर अभी भी जिले में 43 हजार कापियों का
मूल्यांकन कार्य बाकी है। जिले में कुल 2,229 परीक्षकों में 857 परीक्षक ही
केंद्रों पर मौजूद है। परीक्षक को सवा मिनट में एक कापी चेक करनी होगी,
जबकि बोर्ड के अनुसार एक कापी के मूल्यांकन के लिए साढ़े आठ मिनट मिलते
हैं।
इसमें विद्यार्थियों की योग्यता के सही मूल्यांकन को लेकर बड़ा
सवाल खड़ा हो रहा है। ज्ञात हो कि यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट
परीक्षा की कापियों को जांचने की बढ़ी हुई समय सीमा शनिवार को समाप्त हो
रही है। ऐसे में मूल्यांकन में देरी के चलते खराब स्थिति इंटरमीडिएट की
रसायन विज्ञान, होम साइंस, आलेखन और जीव विज्ञान की कापियों की हैं।
होम
साइंस की हालत यह है कि हर परीक्षक को 760-760 कापियां जांचनी होंगी। वहीं
आलेखन की 952 कापियों का मूल्यांकन एक परीक्षक को करना होगा। उधर, शहर के
तीन मूल्यांकन केंद्रों पर कापियां के जांचने का काम चल रहा था। इसमें
आरआर इंटर कालेज और एसडी इंटर कालेज में हाईस्कूल की उत्तर पुस्तिकाओं का
मूल्यांकन कार्य किया जा रहा था। जहां पर अब मूल्यांकन कार्य पूर्ण हो गया
है।
केंद्रों से अवार्ड ब्लैंक बोर्ड को भेजनेे की तैयारी चल रही है। उधर,
जीआईसी मूल्यांकन केंद्र पर कापियाें की संख्या ज्यादा होने और परीक्षकों
की कमी होने से 30,618 कापियां दूसरे जनपद के मूल्यांकन केंद्रों पर 15
अप्रैल को भेजी गई थी।
इनमें इंटर की रसायन विज्ञान की 5,141, उर्दू की
1,214, भौतिक विज्ञान की 17,285 कापियां रायबरेली और जनपद सीतापुर को रसायन
विज्ञान की 7,005 कापियां भेजी गई है। उप नियंत्रक योगेंद्र कुमार ने
बताया कि मूल्यांकन को भेजी गई कापियां अभी तक वापस नहीं आई है।