हरदोई। यूं तो ज्योतिष में संयोग, योग और राजयोग के लिए जन्मकुंडली में ग्रहों की चाल देखी जाती है और सियासत में शतरंज की बिसात की तरह मोहरों की चाल पर नजर रखी जाती है।
यह चाल कभी-कभी बड़े संयोग भी बना देती है।
अब सियासत का इसे संयोग कहें या महज इत्तफाक कि प्रदेश के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार नितिन अग्रवाल, राज्यमंत्री रजनी तिवारी मूल रूप से एक ही जिले के हैं और इन तीनों विधायकों की जीत का सफर बसपा से शुरू हुआ था।
बसपा में एक समय तीनों साथ रह चुके अब भाजपा में साथ-साथ हैं और सबसे अहम बात यह कि एक ही मंत्रिमंडल का हिस्सा हैं। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक जिले के मल्लावां कस्बे के मोहल्ला गंगारामपुर के मूल निवासी हैं।
उन्होंने सियासी सफर कांग्रेस से शुरू किया था। पहला चुनाव 2002 में अपने गृह नगर से मल्लावां सीट से बेहद कम अंतर से चुनाव हार गए थे। इसके बाद उन्होंने पड़ोसी जिले उन्नाव से 2004 में बसपा से लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।
इस तरह उन्हें सियासत में पहली जीत बसपा से मिली। लंबे समय तक बसपा में रहे बृजेश पाठक ने 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा में एंट्री करते हुए लखनऊ से लगातार दूसरी बार विधायक बनकर कानून मंत्री से डिप्टी सीएम बनने तक का सफर तय किया है।
वहीं, प्रदेश की योगी 2.0 सरकार में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाए गए नितिन अग्रवाल का सियासी सफर बसपा से शुरू हुआ और पहली बार 2008 के उपचुनाव में वह बसपा से लड़े और जीत दर्ज की।
उनके पिता नरेश अग्रवाल ने इस्तीफा देकर उनके लिए सीट खाली की थी। 2012 में वह सपा सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।
विधानसभा चुनाव 2017 में सपा से जीत दर्ज करने के बाद पिता नरेश अग्रवाल के राज्यसभा टिकट काटे जाने से खफा नितिन अग्रवाल ने पिता के साथ भाजपा में प्रवेश किया और पिछली सरकार में विधानसभा उपाध्यक्ष तक का सफर तय किया।
भाजपा से 2022 में विस चुनाव लड़ने से पहले उन्होंने विधानसभा उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। भाजपा से जिले में सबसे बड़ी जीत दर्ज कर मंत्री बने नितिन अग्रवाल को भी पहली जीत बसपा से ही मिली थी।
उधर, प्रदेश सरकार में पहली बार राज्यमंत्री बनीं और शाहाबाद विधानसभा सीट से विधायक रजनी तिवारी को भी पहली बार बसपा से ही जीत मिली थी। रजनी पहली बार बसपा के टिकट पर 2008 के उपचुनाव में चुनी गईं थी।
उनके पति उपेंद्र तिवारी के निधन से रिक्त हुई सीट पर बिलग्राम सीट से वह पहली बार उपचुनाव में रिकार्ड मतों से जीतीं थी। 2012 के चुनाव में बसपा से वह सवायजपुर सीट से चुनी गईं।
2017 के चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा में प्रवेश किया और शाहाबाद सीट से जीत दर्ज की। इस बार भी शाहाबाद से भाजपा से उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की।