हरदोई। विधानसभा चुनाव की बज रही रणभेरी के लिए अब फैसले की घड़ी बहुत दूर नहीं रह गई है। 23 फरवरी को होने जा रहे मतदान से प्रत्याशियों की जीत-हार का निर्णय ईवीएम में लॉक हो जाएगा।
इस बीच जिले की सभी सीटों पर लड़ रहे करीब 85 प्रत्याशियों में जो प्रत्याशी मुख्य मुकाबले में हैं, वे हर तरह से प्रयास कर अपने भाग्य विधाता वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए तेजी पकड़े हुए हैं, क्योंकि बहुत से लोग इतिहास लिखने की तैयारी में हैं।
अबकी का विस चुनाव बहुत मायने में खास है। एक तो कोरोना से दुनिया से अलविदा हो चुके तमाम लोगों में सियासत के कुछ विशेष जानकार भी थे, वर्षों तक वे किसी एक खास मंच के प्रमुख चेेहरे रहे।
कुछ ऐसे भी थे जो सभाओं एवं सोफों की रौनक बढ़ाया करते थे। उनकी कमी भले ही सार्वजनिक रूप से उनके लोग न कहते हों, पर सच्चाई यह है कि वर्षों पुराने इन चेहरों की नामौजूदगी उन चेहरों की रंगत को फीका जरूर करती है, जो उनके चहेतों में रहे हैं।
इसके अलावा दल बदल के सिलसिलों से लेकर कई राजनीतिक फायदों के लिए हुए बेमेल दल मिलन के मसले हों या फिर दल बदलने के बाद दिल बदलने से लेकर अहम और वहम की पृष्ठभूमि तैयार करने वाले कुछ मठाधीश, जिनसे तमाम सियासी लोगों से आम जन से दूर हो गए या फिर किनारे लगा दिए गए।
इस तरह के तमाम फैक्टर इस चुनाव में हैं, जिससे कुछ स्थानों पर जीतहार के अंतर में फर्क जरूर पड़ेगा। सियासी जानकार कहते हैं कि एक आम व्यक्ति किसी से भी सिर्फ अपनापन चाहता है।
एक बुजुर्ग कहते हैं कि यह सही है कि सियासत के रंग बदलते रहते हैं, मगर पिछले कुछ समय में कुछ लोगों ने दल ही नहीं बदले, बल्कि दिल भी बदल लिए, जिससे कुछ क्षेत्रों में नजारे बदले हुए से हैं।