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Hardoi News: दो माह ही चला ऑक्सीजन प्लांट, फिर सिलिंडरों के भरोसे

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फोटो-11- मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में कंसंट्रेटर से मरीजों को दी जा रही ऑक्सीजन। संवाद
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तकनीकी खामी से फिर बंद हुआ संयंत्र, भर्ती मरीजों पर हर रोज खाली हो रहे छह सिलिंडर
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में लाखों रुपये की लागत से बनाए गए ऑक्सीजन प्लांटों की व्यवस्थाएं एक बार फिर चरमरा गई हैं। महज दो माह पहले दुरुस्त कर चालू किए गए ये प्लांट तकनीकी खराबी के चलते एक बार फिर बंद हो गए हैं। इसके परिणामस्वरूप मरीजों को अब फिर से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और सिलेंडरों के भरोसे रहना पड़ रहा है। इससे अस्पताल प्रबंधन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है, क्योंकि हर रोज छह से सात ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हो रहे हैं।

मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी गेट के पास स्थापित ऑक्सीजन प्लांट, जो 500 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन उत्पादन करने की क्षमता रखता है, लंबे समय से खराब था। प्रबंधन द्वारा 28 नवंबर को इसे दुरुस्त करवाकर चालू किया गया था, जिससे मरीजों को सीधे बेड पर पाइपलाइन के माध्यम से ऑक्सीजन मिलने लगी थी। इस व्यवस्था से कंसंट्रेटर और सिलेंडरों पर मरीजों की निर्भरता समाप्त हो गई थी। हालांकि, यह राहत मात्र दो महीने ही टिक पाई और प्लांट फिर से बंद हो गया। प्रबंधन का कहना है कि तकनीकी खामियों के कारण प्लांट संचालित नहीं हो पा रहा है, जिससे मरीजों को ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए पुराने संसाधनों पर लौटना पड़ा है।
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सिलेंडर भरवाने की आड़ में मनमानी का अंदेशा
ऑक्सीजन प्लांट के बार-बार बंद होने से यह सवाल उठ रहा है कि कहीं सिलेंडर भरवाने की आड़ में जिम्मेदारों द्वारा कोई खेल तो नहीं खेला जा रहा। एक ऑक्सीजन सिलेंडर भरवाने में 400 से 450 रुपये का खर्च आता है। निजी स्तर पर हर सप्ताह लगभग 40 से 50 सिलेंडर भरे जाते हैं। यह अंदेशा जताया जा रहा है कि निजी लाभ और कमीशन के चलते ऑक्सीजन प्लांटों के संचालन पर जोर नहीं दिया जा रहा है।
सांस के मरीजों को हो रही दिक्कत
वर्तमान में आकस्मिक कक्ष में सांस के कई मरीज भर्ती हैं, जिन्हें निरंतर ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। शांति देवी, अब्दुल हमीद और मनोज कुमार जैसे मरीजों के परिजनों को ऑक्सीजन सिलेंडर समाप्त होने पर अस्पताल कर्मचारियों के आगे गिड़गिड़ाना पड़ता है। कई बार सिलेंडरों की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में, ऑक्सीजन प्लांट के चालू रहने से मरीजों को बेड पर ही ऑक्सीजन मिलने से काफी राहत मिलती थी, जो अब फिर से छिन गई है।
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वर्जन
संयंत्र को दोबारा चालू कराने के लिए सायरिक्स कंप़नी को निर्देशित कर दिया गया है। कार्यदायी संस्था के अभियंता जल्द ही आकर संयंत्र की खामियां दूर कर चालू करा देंगे।-डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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