हरदोई। मौसम ने एक बार फिर से करवट बदल ली। सुबह से ही कोहरा छाया रहने से मंगलवार की दोपहर के एक बजे तक सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए।
दोपहर बाद सूर्य निकलने के बाद भी बदलाें संग लुका छिपी चलती है। सर्द हवाओं की वजह से भी लोगों की कंपकपी छूटती रही। सर्दी बढ़ने से लोग दिन भर अलाव तापते नजर आए। कोहरे की वजह से बस और ट्रेनों में भी घंटों की लेट लतीफी दर्ज की गई।
मंगलवार को मौसम का मिजाज सुबह से ही बिगड़ा रहा। घने कोहरे के कारण यातायात प्रभावित रहा। सुबह घना कोहरा होने की वजह से वाहनों को लाइट जलाकर चलना पड़ा। दोपहर को एक बजे तक कोहरा छाया रहा, इससे बस स्टेशन और रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भीड़भाड़ कम दिखी। दोपहर एक बजे के बाद भी सूरज की बादल से लुकाछिपी जारी रही।
इससे लोगों की ठंड से कंपकंपी छूटती रही। मौसम वेधशाला प्रेक्षक रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि मंगलवार को कोहरे की दृश्यता 50 से 100 मीटर रही। इससे अधिकतम तापमान में कुछ कमी आई। अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 12.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सर्द हवाएं 4 किमी प्रति घंटा की गति से और आद्रता सुबह 90 प्रतिशत और शाम को 89 प्रतिशत दर्ज की गई।
घंटों की देरी से चलीं बस और ट्रेन
हरदोई। कोहरे की वजह से सुबह के बस और ट्रेनों में घंटों की देरी दर्ज की गई। बसें एक से डेढ़ घंटे की देरी से पहुंची। इससे यात्रियों को परेशान होना पड़ा। वहीं अप और डाउन रूट की कई ट्रेनें घंटाें की देरी से पहुंची। लखनऊ की ओर ट्रेन संख्या 12230 पौने दाे घंटे की देरी से, 13010 दून एक्सप्रेस सवा दो घंटे, 12232 लखनऊ एक्सप्रेस ढाई घंटे की देरी से, 22356 पाटलीपुत्र चंडीगढ़ एक्सप्रेस दो घंटे की देरी से, ट्रेन संख्या 13308 किसान एक्सप्रेस तीन घंटे की देरी से, 13006 पंजाब मेल सवा दो घंटे की देरी से पहुंची। 13152 सियालदह एक्सप्रेस तीन घंटे और 15910 अवध आसाम एक्सप्रेस पौने पांच घंटे की देरी से पहुंची।
पाला रबी फसलों के लिए है लाभदायी : कृषि वैज्ञानिक
हरदोई। मौसम में हो रहे बदलाव और कोहरा व पाला किसानों के लिए लाभदायक और नुकसानदायक है। कृषि विज्ञान केंद्र प्रथम के अध्यक्ष कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके तिवारी ने बताया कि रबी फसलों की बढ़वार के लिए मौसम में बदलाव जरूरी है। कोहरा के साथ पाला गिरने की भी संभावना है। पाला रबी फसलों के लिए लाभदायी है। टमाटर , आलू, मटर के लिए नुकसानदेय है। बताया कि किसान मटर, टमाटर और आलू की फसल को कोहरा व पाला से बचाव के लिए किसान रसायनों का उपयोग करें। फसलों के हिसाब से रसायन का घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी जाती है।