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Hardoi News: न्यायाधीश की सतर्कता ने खोली पुलिस के गुडवर्क की पोल

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- अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट अंजली रानी का निर्णय- पुलिस नहीं दिखा पाई आरोपी के बालिग होने का प्रमाण
तमंचा रखने के आरोपी किशोर की नहीं दी रिमांड
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। न्यायालय की सतर्कता ने पुलिस के गुडवर्क की पोल खोलकर रख दी। कछौना कोतवाली पुलिस ने एक नाबालिग को तमंचा और कारतूस रखने का आरोपी बनाकर रिमांड लेने के लिए न्यायालय में पेश कर दिया। न्यायालय ने आरोपी के बालिग होने को लेकर सबूत मांगा तो पुलिस के जिम्मेदार बगले झांकने लगे। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम) अंजली रानी ने रिमांड लेने से इनकार कर दिया।

कछौना कोतवाली पुलिस ने बीती 25 अप्रैल को सीतापुर जनपद के मिश्रिख कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी किशोर को गिरफ्तार करने का दावा किया था। पुलिस का दावा था कि किशोर के पास से एक तमंचा और कारतूस बरामद हुआ है। आयुध अधिनियम के तहत आरोपी पर प्राथमिकी भी दर्ज की गई। पुलिस ने रिमांड शीट तैयार कर तमंचे की बरामदगी दिखाते हुए एसीजेएम की अदालत में आरोपी को पेश किया गया। पुलिस ने आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का अनुरोध न्यायालय से किया।
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सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पुलिस से आरेापी के बालिग होने का प्रमाण मांगा। पुलिस के पास न तो जन्मतिथि से संबंधित कोई दस्तावेज था और न ही कोई अन्य विश्वसनीय अभिलेख। इसी बीच जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आरोपी को उपलब्ध कराए गए असिस्टेंट डिफेंस काउंसिल ने उसके नाबालिग होने का तर्क दिया। काउंसिल ने कहा कि आरोपी का मोबाइल फोन पुलिस के पास ही है। मोबाइल में उपलब्ध दस्तावेजों की जांच से स्थिति साफ हो जाएगी। इस पर न्यायालय ने फोन तलब कर लिया। फोन में किशोर के आधार कार्ड समेत कुछ अन्य अभिलेख भी थे। इनसे स्पष्ट हो गया कि आरोपी की उम्र 16 वर्ष है। ऐसे में न्यायालय ने रिमांड याचिका लेने से इनकार कर दिया। न्यायालय के इस निर्णय के बाद पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
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