तेज तपिश और दूर होती प्री-मानसून बारिश से शहर के
साथ ही गांव देहात के चारागाह और मैदान भी तप रहे हैं। इससे जहां इंसान
परेशान हैं, वहीं जानवर भी पानी के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। आलम यह है कि
नदी, पोखर और तालाब सूख चुके हैं। पशु पालकों ने क्षेत्र से गुजरी सई नदी
और तालाबों में पानी छोड़ने की मांग उठाई है।
अबकी भले ही मौसम
वैज्ञानिकों ने मानसून एक्सप्रेस के थोड़ा जल्दी आने की घोषणा की हो, पर यह
इलाका अब तक प्री मानसून वर्षा को तरस रहा है। क्षेत्र से गुजरने वाली सई
नदी भी सूख गई है। मनरेगा से बनाए गए आदर्श तालाब और ताल तलैया में धूल उड़
रही है। ऐसे में पशुओं के लिए पानी का संकट पैदा हो गया है।
खास स्थानों
पर लगाए गए सरकारी नलों के गले भी भूगर्भ जल की सतह खिसकने से सूखे हैं।
पशुओें को एक खेत से दूसरे खेत तक पानी की तलाश में घूमते देखा जा रहा है।
पशु पालक जल संकट को लेकर जानवरों की सेहत के प्रति भी चिंतित हैं। मनरेगा
से गांव-देहात में बने तालाबों पर पानी नहीं है।
इन तमाम आफतों के बीच
नहर का पानी सब का सहारा बना हुआ है, पर नहर के बहाव से दूर बसने वाली जनता
को इसका लाभ लेने को लंबा फासला तय करने की मजबूरी है। क्षेत्रीय
पशुपालकों व कृषकों ने इलाके से गुजरने वाली सई नदी में नहर से पानी
छुड़वाने तथा तालाबों में भी पानी भरने की मांग की है।
उधर, ज्यादातर
तालाबों के सूखने से कपड़े धोने के पेशे से जुड़े लोगों के सामने भी संकट
पैदा हो गया है। यह पेशा करने वाले लोग मोहल्ले के तालाब के घाटों पर कपड़े
धोते हैं। इस गरमी में ज्यादातर तालाब सूखने से उन्हें पानी की तलाश में
भटकना पड़ रहा है।