तीन करोड़ की लागत से निर्मित सीएचसी में प्रमुख सचिव
खाद्य एवं औषधि प्रशासन हेमंत राव के निरीक्षण के बाद भी भर्ती आदि की
सुविधा में सुधार होता नजर नहीं आ रहा। यहां तैनात चिकित्साधिकारी का
तबादला सांडी होने से सीएचसी अब एक फार्मेसिस्ट के सहारे चल रही है।
अस्पताल
के इमरजेंसी वार्ड में अरुणा (17) निवासी उबरिया, सपना (22) निवासी
खम्हरिया, कृपाल (13) निवासी पांडेयपुर तेज बुखार व अन्य बीमारियों से
भर्ती हैं। यहां डाक्टर के न होने से फार्मेसिस्ट इंजेक्शन लगा रहा था। एक
मरीज गर्मी से परेशान होकर बरामदे में जमीन पर लेटा था। पूछने पर बताया कि
यहां कोई सुविधा नहीं है।
यहां मरीज को अपने सहारे ही रहना पड़ता है।
आपरेशन में प्रयुक्त होने वाले उपकरण एक कमरे मेें बंद धूल खा रहे हैं। न
तो बिजली की व्यवस्था है और न पीने के पानी की। यहां का हैंडपंप भी खराब
है। मोटर की खराबी से पानी की टंकी सूखी पड़ी है, जिससे मरीज और
तीमारदाराें क ो पेयजल के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।
ज्ञात हो कि
सीएचसी में फार्मेसिस्ट अजीत, लैब टेक्नीशियन बच्चू लाल, आकाश, डेंटल
हाईजेसिस्ट दीपक, वार्ड आया उमा की तैनाती है। स्वीपर और चौकीदार न होने
सेे प्राइवेट कर्मी मंगल यह सारा काम करते हैं। तत्कालीन एसडीएम अविनाश
कुमार ने डीएम को पत्र लिखकर यहां दो स्टाफ नर्स समेत दो अन्य क र्मियों की
तैनाती की मांग की थी, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
यह हालत तब है, जब यहां
प्रतिदिन 60 से 70 मरीज इलाज के लिए आते हैं। इस बाबत हरपालपुर के चिकित्सा
अधीक्षक डा. स्वामी दयाल ने यहां पर संविदा चिकित्सक की तैनाती की बात कही
है। उन्होंने कहा कि जल्द ही यहां स्टाफ नर्सों की तैनाती होगी।
उधर,
दूर दराज से मरीजों को अस्पताल लाने को समाजवादी एंबुलेंस सेवा की
व्यवस्था की गई, पर सीएचसी पर कोई एंबुलेंस न होने से मरीजों को परेशान
होना पड़ता है। मंगलवार को सेमरिया लीला नगरा के नारायण को तेज धूप में
तांगे पर लिटाकर परिजन अस्पताल लाए, पर अस्पताल में डाक्टर के न होने पर
उन्हें वापस लौटना पड़ा।