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Hardoi News: ई-रिक्शों का ब्योरा देने में कांप रहे जिम्मेदारों के हाथ

Fri, 14 Feb 2025 11:33 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
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- सात विकास खंडों ने डीपीआरओ कार्यालय को नहीं भेजी जानकारी
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- तय समय से चार दिन ज्यादा हो गए, डीएम ने तलब किया है ब्योरा
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत खरीदे गए ई-रिक्शा का ब्योरा देने में कई खंड विकास अधिकारियों के हाथ कांप रहे हैं। डीएम के निर्देश पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने खंड विकास अधिकारियों से तीन दिन में ब्योरा मांगा था। तय समय बीत जाने के बाद भी सात विकास खंडों के खंड विकास अधिकारियों ने कोई जानकारी ही उपलब्ध नहीं कराई है।
जनपद में स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायतों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र (आरआरसी यानी रिकवरी रिसोर्स सेंटर) का निर्माण कराया गया है। जनपद के 770 गांवों में आरआरसी का निर्माण हो चुका है और 550 गांवों में आरआरसी का निर्माण अभी चल रहा है। आरआरसी तक कूड़ा पहुंचाने के लिए ई-रिक्शा खरीदने की व्यवस्था भी की गई थी।
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इसकी खरीद स्वच्छ भारत मिशन के साथ ही ग्राम पंचायतों को मिलने वाले राज्यवित्त के बजट से भी इस्तेमाल किए जाने की अनुमति दी गई थी। बड़ी संख्या में ई-रिक्शा जनपद में खरीदे भी गए। डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने बीते दिनोंं स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत जेम पोर्टल से खरीदे गए ई-रिक्शों का ब्योरा जिला पंचायत राज अधिकारी से मांगा था।
इसी क्रम में जिला पंचायत राज अधिकारी विनय कुमार सिंह ने सात फरवरी को सभी खंड विकास अधिकारियों को पत्र भेजकर तीन दिन के अंदर ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा था। 14 फरवरी बीतने पर भी सात विकास खंडों के जिम्मेदारों ने ई-रिक्शा खरीद का ब्योरा उपलब्ध नहीं कराया है।

इनसेट
इन ब्लाकों से नहीं आया ई-रिक्शा खरीद का ब्योरा
बिलग्राम, कोथावां, हरियावां, टोडरपुर, हरपालपुर, सांडी, टड़ियावां से ई-रिक्शा खरीद का ब्योरा अब तक नहीं भेजा गया है। जिला पंचायत राज अधिकारी विनय कुमार सिंह ने बताया कि संबंधित खंड विकास अधिकारियों काे दोबारा पत्र भेजा गया है। रविवार तक हर हाल में ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा है। अगर रविवार तक ब्योरा नहीं आया तो डीएम के सामने पूरा मामला रख दिया जाएगा।
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इनसेट
जेम पोर्टल से हुई ही नहीं खरीद...इसलिए परेशान जिम्मेदार
जनपद में किसी भी ग्राम पंचायत ने जेम पोर्टल से ई-रिक्शा की खरीद नहीं की है। यही वजह है कि खरीद का ब्योरा देने में जिम्मेदारों के हाथ कांप रहे हैं। चहेती फर्माें से ई-रिक्शा की खरीद कराने वाले कुछ ब्लाकों के जिम्मेदार पुराने शासनादेशाेें का हवाला देकर डीएम के ब्योरा मांगने पर ही सवाल उठा रहे हैं। अब देखना यह है कि ब्योरा मिलने के बाद आगे डीएम इस मामले में क्या कार्रवाई करेंगे।
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