सांसद नरेश अग्रवाल के जन्मदिन पर आयोजित कौमी एकता
सम्मेलन के गहरे सियासी निहितार्थ भी हैं। सम्मेलन में बड़ी संख्या में
मुस्लिम समाज के लोगों की मौजूदगी ने यह भी साबित किया कि उनकी पकड़ हर कौम
में है। दूसरी तरफ अपने जन्म दिन पर उपराष्ट्रपति को बुलाकर सियासी फलक पर
कद का भी अहसास नरेश ने कराया।
कम से कम कम हरदोई के लिए यह पहला मौका है,
जब किसी समारोह में उपराष्ट्रपति ने शिरकत की है। वर्ष 04 से सांसद
नरेश अग्रवाल के जन्मदिन पर शहर में कोई न कोई बड़ा आयोजन होता रहा है। कभी
सियासी दिग्गज तो कभी फिल्मी हस्तियां जन्मदिन की शोभा बढ़ाती रही हैं, पर
अबकी जन्म दिन के जश्न का स्वरूप बदला नजर आया।
जन्म दिन समारोह को कौमी
एकता के सांचे में ढाल दिया गया। सम्मेलन में मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति
हामिद अंसारी मौजूद थे, तो दूसरी ओर गवर्नर राम नाईक। हरदोई के इतिहास में
पहला मौका है, जब उपराष्ट्रपति ने किसी सामूहिक समारोह में शिरकत किया हो।
वह भी जन्म दिन के मौके पर।
यह बात खुद भरे मंच से सांसद नरेश अग्रवाल ने
भी दोहराई। दूसरी ओर गवर्नर रामनाईक की मौजूदगी पर होने वाली कानाफूसी का
भी उन्होंने भरे मंच से जवाब दिया। उपराष्ट्रपति से लेकर गवर्नर तक ने
सांसद नरेश के साथ कई सदन में बिताए पलों को दोहराया।
खचाखच भरे पंडाल में
बड़ी संख्या मुस्लिम समुदाय के लोगों की मौजूदगी ने नरेश अग्रवाल की सियासी
जमीं पर लहलहाती फसल का परिदृष्य पेश किया। इतना ही नहीं इस मंच से सांसद
नरेश के बेटे राज्यमंत्री नितिन अग्रवाल ने ‘विरासत’ संभालने का अघोषित रूप
से एलान भी किया।
कहा कि वह अपने पिता की कौमी एकता की विरासत को निरंतर
आगे बढ़ाएंगे। तीसरी सबसे खास बात यह रही कि सम्मेलन में बतौर विशिष्ट
अतिथि सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव को शिरकत करना था,
पर वह नहीं आए। हालांकि, राज्यमंत्री नितिन ने बताया कि तबियत खराब होने से
सपा महासचिव रामगोपाल यादव कार्यक्रम में शिरकत नहीं कर पाए।