हरदोई। सरकारी और अनुदानित प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल के छात्र-छात्राओं को हर हफ्ते गरम दूध देने को कहा गया है। हालात यह है कि कागज पर तो सभी को दूध मिल रहा है लेकिन हकीकत इसके विपरीत है।
शासन से आई रिपोर्ट ने इसकी पोल खोल दी है। इसके बाद भी मिड-डे मील की जिला कोआर्डिनेटर मंजू यादव दूध देने का दावा कर रही हैं। जांच में स्थिति सामने आने पर जिलाधिकरी ने बीएसए से विद्यालयों का निरीक्षण कर दोषी लोगों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इससे विभाग में हड़कंप मचा है।
शासन ने मिड डे मील योजना के तहत विद्यालयों में बुधवार को बच्चों को 150 व 200 मिली गर्म मीठा दूध देने के निर्देश दिए थे। शिक्षकों की ओर से कनवर्जन कास्ट कम होने की शिकायत मिलने पर शासन ने कनवर्जन कास्ट में भी वृद्धि कर दी है। इसके तहत बुधवार को प्रति छात्र कनवर्जन कास्ट की धनराशि प्राथमिक विद्यालय में 3.09 रुपये से बढ़ा कर 6.99 रुपये और जूनियर में 4.74 रुपये से बढ़ाकर 9.79 रुपये कर दी गई है।
इसके बावजूद जिले में परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को बुधवार को मीठा दूध नहीं मिल पा रहा है। शासन की ओर से जिले की गई समीक्षा में जानकारी मिली कि 4011 विद्यालयों में मात्र 1937 विद्यालयों में ही दूध का वितरण किया गया, जो आधे से भी कम है। जिले में बच्चों को दूध का वितरण न करने पर शासन की ओर से नाराजगी जताई गई। सचिव आशीष कुमार गोयल ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर कर कहा कि विद्यालयों में बच्चों को हर हाल में दूध दिया जाए। शिक्षा निदेशक के पत्र पर जिलाधिकारी रमेश मिश्र ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को विद्यालयों की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस पत्र के आने से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
सभी विद्यालयों में दूध का वितरण किया जा रहा है। उनके पास सभी विद्यालयों से दूध वितरण का उपभोग प्राप्त हो रहा है। आगे से इसकी जांच कराई जाएगी।
मंजू यादव, डीसी, मिड-डे मील
विद्यालयों का निरीक्षण कराया जाएगा और जहां पर भी दूध का वितरण होते नहीं मिला उन शिक्षकों और खंड शिक्षा अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डा. बृजेश मिश्र, बीएसए