ठकुरीखेड़ा समेत क्षेत्र के चार गांवों का
विद्युतीकरण पूरे जिले के लिए मिसाल बन गया। मात्र दो शिक्षित युवकों की
जागरूकता ने न सिर्फ चारों गांवाें के हजारों बाशिंदों का बिजली का सपना
पूरा कर दिया, बल्कि सभी को यह सीख दिला दी कि जनप्रतिनिधियों की रामजुहार
से ज्यादा खुद पे रखो एतबार तो अधिक सुखी रह सकता है घर संसार।
ज्ञात
हो कि ठकुरीखेड़ा, नंगापुरवा, मढ़िया व गुलाबपुरवा में आजादी से लेकर अब तक
किसी गांव में विद्युतीकरण नहीं किया जा सका है। हर चुनावी बेले पर यहां
बिजली मुद्दा तो बनती है और सबसे ज्यादा आश्वासन और वोटों की बौछार भी इसी
मुद्दे पर होती है, पर चुनाव निपटने के बाद यह मुद्दा भी वहीं विलीन हो
जाते हैं।
कुल मिलाकर क्षेत्र के इन चार गांवों के बाशिंदे आज तक यही नहीं
जान पाए थे कि आखिर बिजली के बल्ब टिमटिमाते कैसे हैं और पंखा हवा कैसे
देते हैं। गांव के बाशिंदों का बिजली का सपना सपना ही रह जाता, यदि गांव के
दो शिक्षित युवाओं ने स्वयं आगे आकर गांव को रोशन करने का बीड़ा न उठाया
होता।
ठकुरीखेड़ा निवासी और पीबीआर इंटर कालेज गौसगंज में टीचर आलोक
द्विवेदी और भारतीय जीवन बीमा निगम में अभिकर्ता आलोक कुमार ने बीड़ा उठाकर
लोगों के सपने साकार कर दिए। इन दोनों ने मिलकर गांवों की किस्मत बदल
दी। गांव में बिजली पहुंचने के सारे रास्ते बंद देख दोनों ने वैकल्पिक
ऊर्जा को गांवों तक लाने का प्रयास किया।
जिसके बाद नेडा द्वारा संचालित
ग्रामीण क्षेत्र में सौर्य ऊर्जा विद्युतीकरण योजना के तहत विद्युतीकरण
कराने का बीड़ा उठाया और करीब चार वर्ष पूर्व चारों गांवों के लोगों को लाभ
दिलाने के लिए नेडा कार्यालय में आवेदन किया गया और इन्हीं लोगों के
प्रयास से चारों गांवों में अब तक 258 सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित किए जा
चुके हैं।
कुल मिलाकर दोनों लोगों की पहल ने ग्रामीणों का वह सपना पूरा कर
दिया जिसकी ओर सोचना भी ग्रामीणों ने बंद सा कर दिया था। ग्रामीणों का कहना
था कि सांसद, विधायक और जनप्रतिनिधि सिर्फ चुनाव लड़ने तक ही सीमित रहते
हैं।
गांव के विकास में उनका कितना योगदान होता है, इन लोगों ने इतने
वर्षों में देख लिया है।
इस पहल को सफल होते देख अन्य जगहों के लोग भी सीख
ले सकते कि जनप्रतिनिधियों के दरवाजों पर चक्कर लगाने से यदि वह स्वयं कु छ
करें तो कम समय में अधिक पा सकते हैं।