हरदोई। राष्ट्रीय लोक अदालत शनिवार को बिखरे परिवारों के लिए खुशियां लेकर आई। लगभग तीन-चार साल से अलग रह रहे पति पत्नी को पारिवारिक मूल्यों, सामाजिक संस्कारों की सीख देकर फिर से एक साथ रहने के लिए तैयार किया। कहीं पति-पत्नी का रिश्ता फिर से जुड़ गया तो कहीं मासूमों को मां की गोद के साथ पिता का दुलार भी हासिल हो गया। लोक अदालत में 15 जोड़े फिर से एक साथ रहने के लिए तैयार हो गए। पारिवारिक न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश अनिल कुमार वर्मा के यहां आठ जोड़े तो अपर प्रधान न्यायाधीश राजेश कुमार सिंह के न्यायालय में दो और अपर प्रधान न्यायाधीश द्वितीय श्रद्धा तिवारी के न्यायालय में भी पांच मामले सुलझाए गए।
केस-1
दोनों पक्षों को पारिवारिक मूल्यों और रिश्तों की अहमियत समझाई
देहात क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने चार अक्तूबर 2023 को विदाई का दावा न्यायालय में दर्ज कराया था। उनकी शादी पांच मई 2017 को बेहटा गोकुल थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी युवक से हुई थी। महिला का कहना था कि ससुरालीजन दहेज की मांग करने लगे थे और मांग पूरी न होने पर 19 जुलाई 2023 को घर से निकाल दिया था। तब से दोनों अलग रह रहे थे। दंपती के दो पुत्र भी हैं। लोक अदालत में दोनों पक्षों को पारिवारिक मूल्यों और रिश्तों की अहमियत समझाई गई। इसके बाद दोनों साथ रहने को तैयार हो गए। लंबे समय से पिता के प्यार से दूर दोनों बच्चों को अब मां की गोद के साथ पिता का दुलार भी मिल गया।
केस-2
चार साल बाद जिंदगी की एक राह पर चलने को तैयार हुए दंपती
बिलग्राम क्षेत्र की एक महिला ने 23 जुलाई 2023 को विदाई का वाद दायर किया था। उनकी शादी 29 अप्रैल 2021 को उन्नाव के बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी युवक से हुई थी। छह जुलाई 2022 से दोनों अलग रह रहे थे। लोक अदालत में दोनों पक्षों ने काउंसलिंग के बाद साथ रहने का निर्णय किया। अदालत से पति-पत्नी खुशी-खुशी साथ चले गए।
केस-3
मोबाइल पर रील देखती थी पत्नी, तीन साल से चल रहा विवाद सुलझा
बेहटा गोकुल थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी युवक ने 19 दिसंबर 2023 को पत्नी की विदाई के लिए वाद दायर किया था। उनकी शादी पांच मई 2017 को देहात कोतवाली क्षेत्र में रहने वाली एक महिला से हुई थी। पति का कहना था कि पत्नी मोबाइल पर रील बहुत देखती थी। मना करने पर विवाद होता था और परिवार से अलग रहने की बात कहती थी। जुलाई 2023 से दोनों अलग रह रहे थे। सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ ही संस्कारों की बात हुई तो दोनों मनमुटाव भुलाकर साथ रहने को राजी हो गए।
जिला जज ने कहा- लोक अदालत में दोनों की जीत
जिला जज रीता कौशिक ने लोक अदालत का शुभारंभ किया। मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित कर माल्यार्पण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि लोक अदालत में किसी भी पक्ष की हार नहीं होती। आपसी सहमति से मामलों का निस्तारण कराया जाता है। यहां किसी एक पक्ष की जीत या हार नहीं होती बल्कि समझौते के माध्यम से दोनों पक्ष विजयी होते हैं। खासकर पारिवारिक विवादों में समझौता टूटते परिवारों को फिर से जोड़ने का काम करता है। उन्होंने लोक अदालत के दौरान लगे विभिन्न स्टॉल्स का भी निरीक्षण किया।
फोटो-02- लोक अदालत में लगे शिविर का निरीक्षण करतीं जिला जज रीता कौशिक व अन्य। संवाद