हरदोई। पोषाहार बनाने के लिए एक विशेष फर्म से एक ही साल में लगभग 10 करोड़ रुपये के कच्चे माल की खरीद का मामला सामने आने के बाद विभाग में खलबली मची है।
अनौपचारिक बातचीत और नाम न छापने के अनुरोध पर कुछ कर्मचारी बताते हैं कि सारा खेल कमीशनबाजी का है। संबंधित फर्म से प्रत्येक माह एनआरएलएम के कुछ जिम्मेदारों को तीन लाख रुपये तक का कमीशन दिया जाता है। यही वजह है कि बावन से लेकर बेहंदर तक के टीएचआर प्लांट के कच्चे माल की खरीद एक विशेष फर्म से ही होती है।
बाल विकास पुष्टाहार विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार भेजा जाता है। आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को पोषाहार दिया जाता है। पोषाहार तैयार करने के लिए जिले में आठ टीएचआर प्लांट लगे हैं। स्वयं सहायता समूह इनका संचालन करते हैं। पोषाहार तैयार करने के लिए कच्चे माल की खरीद की जाती है।
कच्चे माल की खरीद पिछले एक वर्ष में कोथावां में संचालित एक विशेष फर्म से ही की गई। लगभग 10 करोड़ रुपये का भुगतान फर्म को किया गया। एक ही फर्म से सभी टीएचआर प्लांट ने कच्चा माल खरीदा, तो चर्चाएं तेज हो गईं। डीएम ने इस मामले की जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया। हकीकत तो जांच रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगी, लेकिन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े जिम्मेदार शक के घेरे में हैं। दरअसल आम चर्चा भी यही है कि तीन लाख रुपये महीने के कमीशन के चलते सारा कच्चा माल एक ही फर्म से खरीदा गया है।
डीएम की ओर से बनाई गई जांच कमेटी में जिला विकास अधिकारी और परियोजना निदेशक शामिल हैं। इनमें से एक अफसर ने संबंधित स्वयं सहायता समूहों के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष से पूछताछ की। इसमें खुद के साथ ही विभागीय अफसरों को बचाने के लिए गजब का तर्क दिया जा रहा है।
इन लोगों का कहना है कि एक ही दुकान से सस्ता और उधार माल मिल रहा था, इसलिए सबने वहीं से खरीद लिया। हरदोई, संडीला और शाहाबाद में इतनी बड़ी बाजार होने के बाद भी एक छोटे से कस्बे की दुकान में इतना ज्यादा उधार और सस्ता माल मिलने के तर्क पर भी सवाल उठ रहे हैं।