खाद्य पदार्थों को तलने के लिए प्रयोग किए जाने वाले
तेल में पाया जाने वाला ट्रांस फैटी एसिड (टीएफए) लोगों के लिए जाने और
अनजाने सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा है। जानकारी के अभाव में लोग इस ओर
बेधड़क होकर निर्धारित मानकों से अधिक मात्रा में टीएफए ले रहे, जिससे कई
गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
इस संबंध में रिसर्च रिपोर्ट को लेकर खाद्य
एवं औषधि सुरक्षा विभाग में खलबली मच गई है। विभाग ने इस ओर जहां लोगों
को जागरूक करने के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है, वहीं किसी भी व्यक्ति
को अपने या खरीदे गए खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता की जांच कराने के लिए
निर्धारित शुल्क जमाकर परीक्षण कराने की सुविधा दी है।
विभाग के चीफ फूड
सेफ्टी आफीसर (सीएफएसओ) सुरेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि तेल में पाए जाने
वाली टीएफए यानी ट्रांस फैटी एसिड को लेकर हुए रिसर्च के बाद आई रिपोर्ट
काफी चौंकाने वाली है। किसी भी तेल में टीएफए की मात्रा 3 प्रतिशत से अधिक
सेहत के लिए ठीक नहीं मानी जा रही है, पर तमाम तेलों में यह मात्रा 24
प्रतिशत तक है, जो कि सेहत के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।
यही कारण है कि
इसको लेकर दुनिया भर में तेल में टीएफए को जीरो प्रतिशत तक लाने के लिए
कार्य शुरू हो चुका है। उन्होंने बताया कि रिसर्च रिपोर्ट आने के बाद जहां
तमाम तेल कंपनियों में हलचल है, तो वहीं विभाग भी इस ओर जनमानस को जागरूक
करने का प्रयास की पहल कर रहा है।
उन्होंने बताया कि रिफाइंड तेल में जहां
टीएफए 0.2 से 2 प्रतिशत तक पाया गया है, वहीं वनस्पति तेलाें में टीएफए का
स्तर 9 से 24 प्रतिशत तक रिसर्च में पाया गया। जिसके बाद इस ओर लोगों को
जागरूक होकर अपनी सेहत के प्रति फिक्रमंद होना चाहिए।