हरदोई। जिस पिहानी - चपरतला मार्ग की दुर्दशा को लेकर सियासी और सोशल मीडिया पर संग्राम मचा हुआ है, उसका निर्माण न हो पाने की असली वजह लोक निर्माण विभाग के आलाधिकारी हैं। अपने चहेते को मार्ग निर्माण का टेंडर दिलाने की कवायद में लगे अफसर चार बार पिहानी चपरतला मार्ग के निर्माण को लेकर हुई टेंडर प्रक्रिया विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर निरस्त कर चुके हैं। अफसरों की ये चाहत इलाके के लगभग पचास हजार लोगों के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई है।
पिहानी चपरतला मार्ग की कुल लंबाई 17 किलोमीटर है। इसका चार किलोमीटर हिस्सा दुरुस्त है लेकिन 13 किलोमीटर सड़क जर्जर होने से इस पर चलना तक दूभर है। इस संदर्भ में अमर उजाला ने लोगों को हो रही समस्या पर खबर भी प्रकाशित की थी। वहीं गोपामऊ से भाजपा विधायक श्याम प्रकाश ने भी मार्ग निर्माण के लिए शासन में कई बार पैरवी की। क्षेत्र की खराब सड़कों के न बनने पर विधायक इस्तीफे तक की पेशकश कर चुके हैं।
13 किलोमीटर 200 मीटर लंबी सड़क के सुधार के लिए 13 करोड़ 87 लाख 41 हजार रुपये का प्रस्ताव 28 फरवरी 2020 को शासन की व्यय वित्त समिति ने मंजूर किया था। बाद में इसमें संशोधन हुआ और 16 मार्च को 12 करोड़ 25 लाख रुपये मंजूर किए गए। संबंधित मार्ग की पत्रावली में भी इसका उल्लेख है। इसके सापेक्ष दस फीसदी बजट भी जारी किया गया था। मार्ग निर्माण की स्वीकृति शासन स्तर से मिलने के बाद भी निर्माण कार्य कराने के लिए टेंडर प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। पांचवीं बार निर्माण कार्य के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। इस बार दस सितंबर तक उक्त कार्य के लिए टेंडर डाले जा सकते हैं।
कमेटी गठित, हर बार बताते अपरिहार्य कारण
उक्त निर्माण कार्य की टेंडर प्रक्रिया पूरी कराने के लिए एक कमेटी गठित है। कमेटी में लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड एक और निर्माण खंड दो के अधिशासी अभियंता शामिल हैं। इस कमेटी के अध्यक्ष उन्नाव सर्किल के अधीक्षण अभियंता हैं। जिले से चार बार निविदा प्रक्रिया पूरी कर मंजूरी के लिए अधीक्षण अभियंता के पास भेजी जा चुकी है, लेकिन अपरिहार्य कारण बताकर अधीक्षण अभियंता हर बार पूरी प्रक्रिया को ही निरस्त कर देते हैं।
इस तरह हुई टेंडर प्रक्रिया
29 फरवरी 2020 को उक्त कार्यों के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए।
22 अप्रैल 2020 को दूसरी बार टेंडर आमंत्रित किए गए।
28 मई 2020 को अधीक्षण अभियंता ने प्रक्रिया निरस्त कर तीसरी बार टेंडर आमंत्रित किए।
9 जुलाई 2020 को अधीक्षण अभियंता ने फिर से टेंडर निरस्त कर दिए।
17 जुलाई 2020 को फिर से टेंडर लगाने के निर्देश दिए गए।
20 जुलाई 2020 को चौथी बार टेंडर लगाए गए।
18 अगस्त 2020 को पांचवीं बार टेंडर आमंत्रित किए गए।
! तो पूरा हो गया बुना गया ताना बाना
अधीक्षण अभियंता के स्तर से जिस फर्म को काम दिए जाने का ताना बाना बुना जा रहा था, वह पूरा हो गया है। शुरुआत के चार टेंडरों में जो एक मात्र फर्म कार्य करने के योग्य पाई गई थी और टेंडर क्वालीफाई किया था। उसे टेंडर न डालने की हिदायत ऊपर से दी जा चुकी है।
ऐसे टूटे नियम
अधीक्षण अभियंता के स्तर से शुरुआत में सिंगल टेंडर आने की बात कहकर प्रक्रिया निरस्त की जा रही थी। वास्तविकता ये है कि अगर तीसरी बार टेंडर आमंत्रित करने पर भी एक ही फर्म क्वालीफाई करती है तो उसे काम दिया जा सकता है, लेकिन अपनी चहेती फर्म को लाभान्वित करने की कवायद में इस नियम को भी ठेंगा दिखा दिया गया।
अयोग्य फर्म को काम दिलाना चाहते हैं आलाधिकारी : श्यामप्रकाश
क्षेत्रीय विधायक श्याम प्रकाश इस मुद्दे पर काफी तल्ख नजर आए। उन्होंने कहा कि चार बार टेेंडर प्रक्रिया धन आवंटन के बाद निरस्त की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में आया है कि लोक निर्माण विभाग के कुछ आलाधिकारी एक विशेष फर्म से सांठ गांठ कर टेंडर दिलाने की फिराक में हैं। उक्त फर्म के पास आवश्यक अभिलेख पूरे नहीं हैं। हर बार जो फर्म क्वालीफाई कर रही है, उसको काम देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे मामले को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने भी रखेंगे। किसी भी हाल में गुणवत्ताहीन कार्य नहीं होने देंगे।
मार्ग बनने से इन गांवों के लोग होंगे लाभान्वित
पिहानी-चपरतला मार्ग बनने से सहातदनगर, भोगियापुर, जाजूपारा, डर्राबुखारपुर, सलेमपुर, जहानीखेड़ा, पतौनमिश्र, हर्रेया, नरधिरा, भरौना, रसूलापुर, बहादुरनगर, गोखलिका आदि गांवों के लोग लाभान्वित होंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित डेल पंडरवा, बहिरमा, अंबारी, जलालपुर गोपी, महमूदपुर सरैंया आदि गांवों के लोगों को पिहानी या हरदोई जाने में भी आसानी रहेगी।