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समस्या में शिक्षक : एजेंसी पर फोन नहीं उठता, टैबलेट से बुकिंग नहीं हो रही

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फोटो 20: प्राथमिक विद्यालय गद्दीपुरवा में लकड़ी वाले इसी चूल्हे पर बनाया जाता है एमडीएम। संवाद
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हरदोई। खाड़ी देशों में युद्ध का असर आमजन पर सीधा पड़ रहा है। व्यावसायिक सिलिंडर मिल नहीं रहे वहीं स्कूलों में मिड-डे मील बनवाए जाने के लिए शिक्षकों को भी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों के मुताबिक, एजेंसी पर फोन नहीं उठता, टैबलेट से बुकिंग नहीं होती। ऐसे में घर से सिलिंडर लाकर भी उपयोग कर चुके हैं। सिलिंडर न होने पर लकड़ी और ईंट के चूल्हे बनाकर मिड-डे मील पकवाया जा रहा है।
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युद्ध से पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति और परिवहन की समस्या से अब आमजन के साथ ही सरकारी सिस्टम भी प्रभावित होने लगा है। हालांकि प्रशासन ने व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर न मिलने की स्थिति में विकल्प के तौर पर घरेलू एलपीजी सिलिंडर देने की व्यवस्था दी है। इसमें सिलिंडर बुकिंग की हाईटेक व्यवस्था और एजेंसियों के जिम्मेदारों की लापरवाही बाधक दिख रही है। स्कूलों में मिड-डे मील बनवाए जाने के लिए सिलिंडर की बुकिंग से लेकर आपूर्ति तक के लिए शिक्षकों को मशक्कत करनी पड़ रही है।



ऐसे में 3,466 परिषदीय स्कूलों में से करीब 30 प्रतिशत स्कूलों में ही घरेलू एलपीजी सिलिंडर के उपयोग से मिड-डे मील बनवाया जा पा रहा है। 70 प्रतिशत स्कूलों में मिड-डे मील बनवाए जाने के लिए शिक्षकों को लकड़ी और ईंट के चूल्हे फिर से बनवाने पड़े हैं। इन चूल्हों पर ही रसोइया के माध्यम से मिड-डे मील पकवाया जा रहा है। स्कूल आने वाले बच्चों को साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार भोजन का वितरण कराया जा रहा है। ऐसे में रसोइयों को भी लकड़ी और ईंट वाले चूल्हे पर रोटी-सब्जी और तहरी बनाने में धुआं आदि से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जैसे-तैसे विद्यालयों में मिड-डे मील का वितरण किया जा रहा है।
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केस एक
विकास खंड टड़ियावां के प्राथमिक विद्यालय गद्दीपुरवा में ईंटों के चूल्हे पर विद्यालय के टूटे फर्नीचर आदि की लकड़ी से मिड-डे मील बनवाया जा रहा है। स्कूल की प्रिंसिपल नीलम ने बताया कि विद्यालय में करीब 250 बच्चे हैं। अभी तक गैस सिलिंडर से ही खाना बनता था, स्कूल का सिलिंडर न भर पाने पर एक सिलिंडर अपने घर से लाकर उपयोग के लिए दिया था। उस सिलिंडर के खत्म होने के बाद हम दो बार गोपामऊ की सैनिक गैस एजेंसी पर जा चुके हैं, सिलिंडर नहीं मिला। मजबूरी में हमें ईंटों का चूल्हा बनाकर लकड़ी से खाना बनवाना पड़ रहा है। रसोइया राजेश्वरी, सरिता, रामदेवी व सोना अब लकड़ी के चूल्हे पर मिड-डे मील पका रही हैं।


विकास खंड टड़ियावां के टड़ियावां उच्च प्राथमिक विद्यालय में लकड़ी और ईंटों के चूल्हे पर ही मिड-डे मील बनवाया जाता है। प्रिंसिपल अनुराधा शुक्ला ने बताया कि विद्यालय में 152 छात्र पंजीकृत हैं। सिलिंडर अभी तक था, कई दिन पहले खत्म हो गया। इससे सिलिंडर न होने से मजबूरी में ईंटों का चूल्हा बनाकर लकड़ी से खाना बनाना पड़ रहा है। अनूपा, राजेश्वरी, सुनीता और कांति रसोइया से लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनवाया जा रहा है।


केस तीन

विकास खंड टड़ियावां के प्राथमिक विद्यालय सैंचामऊ में भी सिलिंडर नहीं हैं। प्रिंसिपल सुभाष कुमार ने बताया कि मिड-डे मील इन दिनों लकड़ी के चूल्हे पर बनवाता हूं। वैसे बच्चे भी इस समय कम आ रहे हैं। गेहूं की कटाई के कारण उपस्थिति कम रहती है फिर भी स्कूल आने वाले बच्चों को मिड-डे मील दिया जा रहा है। रसोइया जगरानी और मीना चूल्हों पर मिड-डे मील पकाती हैं। बताया कि सिलिंडर की बुकिंग के लिए जो एजेंसी का नंबर है उस पर हम लोग फोन करते हैं, फोन नहीं उठता। हम लोगों के पास टैबलेट हैं उससे बुक करते हैं तो सिलिंडर बुक नहीं होता। ऐसे में स्कूल में सिलिंडर नहीं है और लकड़ी-चूल्हा ही विकल्प है।


विद्यालयों को प्राथमिकता पर सिलिंडर दिए जाने की व्यवस्था दी गई है। ऐसे में बुकिंग न होना और एजेंसी का फोन न उठना गंभीर बात है। इसकी जानकारी जुटाई जाएगी। शिक्षक अपने खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से सिलिंडर की मांग कर सकते हैं। -दिलीप कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी

फोटो 20: प्राथमिक विद्यालय गद्दीपुरवा में लकड़ी वाले इसी चूल्हे पर बनाया जाता है एमडीएम। संवाद

फोटो 20: प्राथमिक विद्यालय गद्दीपुरवा में लकड़ी वाले इसी चूल्हे पर बनाया जाता है एमडीएम। संवाद

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