हरदोई। कक्षा सात की छात्रा के साथ छेड़छाड़ के आरोपी शिक्षक को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) मनमोहन सिंह ने दोषी करार दिया है। अभियुक्त को पांच साल की सजा सुनाते हुए 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। घटना को दबाने के लिए बच्ची को धमकाने में अभियुक्त के दो भाइयों, जिनमें एक इसी विद्यालय का प्रधानाचार्य है, को भी एक-एक साल की सजा सुनाई है। जुर्माने की आधी रकम पीड़िता को देने के आदेश भी न्यायाधीश ने दिए हैं।
बिलग्राम कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी शख्स ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उसकी पुत्री (10) बिलग्राम के एक स्कूल में पढ़ती थी। 23 जुलाई 2014 को लंच के बाद शिक्षक सतेंद्र त्रिवेदी ने उसे प्रधानाचार्य कक्ष में बुलाया था। यहां उसके साथ अश्लील हरकतें की थी। छात्रा के शोर मचाने पर सतेंद्र के भाई प्रधानाचार्य देवेंद्र त्रिवेदी और शैलेंद्र त्रिवेदी भी आ गए थे। दोनों ने छात्रा को किसी से कुछ बताने पर स्कूल से नाम काटने और परिवार को बर्बाद करने की धमकी दी थी।
छात्रा ने घर पहुंचकर मां को घटना बताई थी। विवेचक ने पहले अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी। पिता ने इसके खिलाफ अदालत में विरोध याचिका दाखिल की थी। न्यायालय ने अंतिम रिपोर्ट निरस्त कर अग्रिम विवेचना का आदेश दिया था। इसके बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपों को झूठा बताते हुए गांव की रंजिश और राजनीतिक दबाव में फंसाने का तर्क दिया। कहा कि घटना के समय सतेंद्र त्रिवेदी हरदोई स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण ले रहा था। समर्थन में उपस्थिति पंजिका और गवाह पेश किए।
अदालत ने शिक्षक और दोनों भाइयों की भूमिका अलग-अलग मानी
अदालत ने साक्ष्यों के विश्लेषण में माना कि सतेंद्र त्रिवेदी ने छात्रा के साथ अश्लील हरकत की थी। देवेंद्र व शैलेंद्र ने घटना सामने आने पर छात्रा को धमकाया था। विशेष न्यायाधीश ने कहा कि शिक्षक और छात्र के संबंध की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली ऐसी घटनाएं बच्चों में भय और असुरक्षा पैदा करती हैं। बच्चों के शैक्षणिक भविष्य और सर्वागीण विकास को प्रभावित करती हैं। अदालत ने तीनों दोषियों को परिवीक्षा का लाभ देने से भी इनकार कर दिया।