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Hardoi News: टीबी मरीजों का भुला दे रहे दर्द, क्षय केंद्र हटने से भटकना पड़ेगा दर बदर

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हरदोई। जिले में टीबी से पीड़ित मरीजों को इलाज के लिए दर बदर भटकना पड़ेगा। मेडिकल कॉलेज परिसर से जिला क्षय केंद्र को हटाने का फरमान जारी किया गया है।
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प्राचार्य ने प्लोमनरी विभाग की स्थापना का हवाला देते हुए टीबी क्लीनिक को एक सप्ताह में हटाने के आदेश दिए हैं। अब जिला क्षय केंद्र कहां स्थापित होगा, इसको लेकर संशय बना हुआ है, क्योंकि आठ किमी. दूर सौ शैय्या अस्पताल भी पहुंचना टीबी मरीजों के लिए पीड़ादायक साबित होगा।
स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय परिसर में जिला क्षय रोग केंद्र स्थापित है। मेडिकल कॉलेज आने के बाद जिला क्षय रोग केंद्र को हटाने की लगातार कवायद चल रही है। टीबी पीड़ितों का दर्द देखकर अभी तक केंद्र स्थानांतरित नहीं हुआ था लेकिन अब प्राचार्य ने टीबी क्लीनिक के समकक्ष प्लोमनरी विभाग की स्थापना का हवाला देकर केंद्र को हटाने का आदेश दिया है। जिला क्षय रोग केंद्र से करीब साढ़े सात हजार मरीज पंजीकृत हैं। जिनकी टीबी क्लीनिक से दवा चलती है। टीबी पीड़ितों को वैसे भी चलना दूभर होता है, ऐसे में अगर जिला क्षय रोग केंद्र को कहीं दूसरी जगह भेजा जाता है तो खून व अन्य जांच कराने में मरीज को दौड़-भाग करनी पड़ेगी। मरीज को मेडिकल कॉलेज या फिर सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय जाना पड़ेगा। इसमें मरीज को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
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प्राचार्य बोले प्लोमनरी विभाग बनेगा
हरदोई। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. जेविन बिष्णु गोगोई ने सीएमओ को पत्र भेजकर परिसर में प्लोमनरी विभाग संचालित होने की बात कही है। बताया कि टीबी व चेस्ट (प्लोमनरी) विभाग में एक सहायक आचार्य की नियुक्ति है और सौ छात्रों को एमएनसी में एमबीबीएस छात्रों का प्रवेश होगा। प्राचार्य ने एक सप्ताह में टीबी क्लीनिक को मेडिकल कॉलेज परिसर से किसी दूसरी जगह भेजने की बात कही है।


सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय में नहीं स्थान
हरदोई। जिला क्षय केंद्र को संचालन के लिए सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय में भी संचालित करने का विचार हो रहा है लेकिन वहां स्थान का अभाव बताया जा रहा है। जिला क्षय रोग केंद्र व क्लीनिक को संचालित करने के लिए करीब 10 कक्षों की आवश्यकता है। इसमें एक्सरे मशीन कक्ष, सीबी नॉट जांच कक्ष, माइक्रोस्कोपी, स्टोर रूम, चिकित्सक कक्ष, दवा वितरण कक्ष समेत स्टाफ और अन्य कर्मचारियों के लिए कक्ष चाहिए। इतने कक्ष वहां मिल नहीं रहे हैं ऐसे में टीबी क्लीनिक यदि किसी अन्य स्थान पर गया तो मरीजों को परेशान होना पड़ेगा।
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जिला क्षय रोग केंद्र से क्षय रोग उन्मूलन से संबंधित सभी कार्य किए जाते हैं। पंजीकृत मरीजों का इलाज और दवा वितरण होता है। केंद्र कहीं और स्थापित होगा तो मरीजों को दिक्कत आएगी। अपर निदेशक को पत्र भेजकर दिशा निर्देश मांगे गए हैं। इसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। -डॉ. अरविंद सचान, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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